वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट खास है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट खास है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

000
previous arrow
next arrow
000
000
previous arrow
next arrow

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी, जो रविवार को सुबह 11:00 बजे पेश होने का एक ऐतिहासिक उदाहरण है। बजट भाषण रविवार को आयोजित किया जाएगा, जो 2017 से चली आ रही परंपरा का पालन करता है और इसे 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के अनुरूप बनाया गया है। 1999 में औपनिवेशिक काल के दौरान शाम 5:00 बजे के बजाय इस समय को स्थानांतरित करने से बाजार की जरूरतों के अनुरूप बजट पेश किया जा सकेगा और मार्च के अंत तक संसद द्वारा इसे मंजूरी मिल जाएगी। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी (बुधवार) को शुरू हुआ, और आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी (गुरुवार) को पेश किया गया।

निर्मला सीतारमण अपना लगातार 9वां बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बार सभी की निगाहें बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर टिकी होंगी। सीतारमण ने 2019 में अपने पहले बजट में दशकों से चले आ रहे चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक बही-खाता का अनुकरण किया था। पिछले चार वर्षों की तरह इस साल का बजट भी कागज रहित रूप में पेश किया जाएगा। आम बजट 2025-26 के वे प्रमुख आंकड़े जिन पर नजर रखना जरूरी है: राजकोषीय घाटा: सरकार के कुल खर्च और आय के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए इसके जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है।

बजट में 4.5 प्रतिशत से नीचे का लक्ष्य हासिल करने के बाद, बाजार अब कर्ज-जीडीपी अनुपात में कमी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सटीक आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। उम्मीद है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चार प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की घोषणा कर सकती है। पूंजीगत व्यय: चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।

निजी क्षेत्र के निवेशकों की सावधानी को देखते हुए, सरकार आगामी बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बनाए रख सकती है और इसमें 10-15 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती है। यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है। कर्ज की रूपरेखा: वित्त मंत्री ने 2024-25 के बजट भाषण में कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 से राजकोषीय नीति का प्रयास केंद्र सरकार के कर्ज को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में कम करने का होगा। बाजार यह देखना चाहेगा कि सरकार कर्ज-जीडीपी अनुपात को कब तक 60 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाने की बात कहती है।

2024 में यह अनुपात 85 प्रतिशत था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 57 प्रतिशत था। उधारी: वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की सकल उधारी का बजट 14.80 लाख करोड़ रुपये था। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से कर्ज लेती है। उधारी का आंकड़ा देश की आर्थिक सेहत और राजस्व संग्रह की स्थिति का संकेत देता है। कर राजस्व: वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सकल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा गया था, जो पिछले वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!