मुंगेर रिश्वत कांड: पेशकार पर गिरेगी गाज, बेगूसराय के सीओ-डीसीएलआर भी जांच के दायरे में
श्रीनारद मीडिया, स्टेट डेस्क:

मुंगेर। प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में दो अप्रैल को 1.70 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए पेशकार मुकेश कुमार की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही है। निगरानी की कार्रवाई के बाद अब इस पूरे मामले में सामान्य प्रशासन विभाग भी सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने स्पष्ट किया है कि मामले में कड़ी कार्रवाई के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र भेजा जाएगा। इसके बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी। इस मामले की जांच का दायरा अब और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। वर्ष 2022 में साहेबपुर कमाल अंचल के तत्कालीन सीओ और बलिया के डीसीएलआर द्वारा फर्जी कागजात के आधार पर तीन कट्टा चार धूर सरकारी जमीन को मु. जावेद के नाम हस्तांतरित करने के मामले को भी गंभीरता से लिया गया है।
इस संदिग्ध जमीन हस्तांतरण को लेकर दोनों अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में आ गई है। जांच के दायरे में अधिकारी, कार्रवाई तय उप मुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जागरण से बातचीत में साफ कहा कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि साहेबपुर कमाल के तत्कालीन सीओ और संबंधित डीसीएलआर के कार्यों की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
जांच में दोषी पाए जाने पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है। डिप्टी सीएम ने यह भी दोहराया कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टालरेंस की नीति पर काम कर रही है। रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े के मामलों में संलिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। इस कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासन अब सिर्फ निचले स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उच्च स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे व सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मामला सरकारी जमीन को सरकारी कराने का बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल अंचल अंतर्गत पंचवीर बाजार के पश्चिम स्थित बहुमूल्य सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा और रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। तीन कट्ठा चार धुर सरकारी जमीन को मु. जावेद ने वर्ष 2022 में फर्जी कागजात के आधार पर तत्कालीन अंचलाधिकारी से दाखिल-खारिज करा लिया,ग्रामीणों के सहयोग से नंदकिशोर प्रसाद ने इस आदेश के खिलाफ पहले बलिया डीसीएलआर न्यायालय में अपील की, लेकिन वहां भी सीओ के आदेश को ही आधार मानते हुए फैसला मु. जावेद के पक्ष में दे दिया गया।
इसके बाद मामला मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त न्यायालय में पहुंचा, जहां वाद लंबित था। इसी दौरान सुनवाई के क्रम में पेशकार मुकेश कुमार ने वादी पर दबाव बनाते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन को बचाना है तो पांच लाख रुपये देने होंगे। आरोप है कि पहले तीन लाख रुपये ले लिए गए और बाद में दो लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की जाने लगी। परेशान होकर नंदकिशोर प्रसाद ने एक अप्रैल 2026 को निगरानी थाना पटना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि के बाद निगरानी विभाग ने ट्रैप की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत दो अप्रैल को जैसे ही वादी ने 1.70 लाख रुपये पेशकार को सौंपे, टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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