वंदे मातरम् राष्ट्र जागृति का महामंत्र : डॉक्टर अशोक प्रियंवद
प्रज्ञा प्रवाह ( चेतना), सिवान इकाई के स्नेह मिलन समारोह का आयोजन महावीरी सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में सम्पन्न
श्रीनारद मीडिया, सीवान, (बिहार):

वंदेमातरम राष्ट्र जागृति का महामंत्र है, जो हमारी धमनियों में ऊर्जा का संचार करता है। जिसके वशीभूत होकर मां भारती के सैकड़ों लाडलों ने समय समय पर अपना सर्वस्व बलिदान दे दिया। वंदे मातरम् के प्रभाव को खंडित करने का 1923 से ही प्रयास किया गया। जिसकी अंतिम परिणति 24, जनवरी 1950 को हुई। जब इसे विस्थापित कर इसे राष्ट्र गान का दर्जा से विस्थापित किया गया। तुष्टीकरण की यह पराकाष्ठा थी। नई पीढ़ी में जोश और ऊर्जा भरने के लिए वंदे मातरम् का गायन अत्यंत आवश्यक है। ये बातें मुख्य वक्ता के तौर पर प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र सह संयोजक विमर्श आयाम डॉक्टर अशोक प्रियंवद ने प्रज्ञा प्रवाह की सीवान इकाई द्वारा आयोजित स्नेह मिलन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर कही।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में बौद्धिक मंच प्रज्ञा प्रवाह (चेतना) की सिवान इकाई द्वारा एक स्नेह मिलन समारोह का आयोजन रविवार को नगर के महावीरपुरम स्थित महावीरी सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में सम्पन्न हुआ। इसमें एक दूसरे से परिचय के साथ “वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ” पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉक्टर प्रजापति त्रिपाठी ने किया। मुख्य अतिथि अमेरिका में प्रबंधन विशेषज्ञ शांता नंद मिश्रा रहे। विद्याभारती के क्षेत्र प्रचार प्रमुख नवीन सिंह परमार बतौर सारस्वत अतिथि मौजूद रहे। मंच संचालन जिला विमर्श आयाम संयोजक डॉक्टर गणेश दत्त पाठक ने किया। आभार ज्ञापन ऋत्विक भारद्वाज ने किया।

महावीरी सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में आयोजित स्नेह मिलन का शुभारंभ आगत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। चेतना के सारण विभाग के संयोजक प्रोफेसर अवधेश शर्मा, जिला संयोजक डॉक्टर शैलेश राम ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। महिला आयाम की प्रदेश संयोजिका विभा द्विवेदी ने संगठन गीत का गायन किया। ऋत्विक भारद्वाज ने वंदे मातरम का गायन किया।
मंच संचालन के दौरान सीवान जिला विमर्श आयाम संयोजक डॉक्टर गणेश दत्त पाठक ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का एक बौद्धिक मंच है, जो तथ्यपूर्ण, सकारात्मक, सृजनात्मक, राष्ट्रवादी विचारों के प्रवाह को सुनिश्चित करता है। इस विश्वास के साथ कि मजबूत विचारों पर ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने बताया कि भ्रम और दुष्प्रचार के दौर में विचार, विमर्श, वैचारिक स्पष्टता के साथ गंभीर तथ्यपूर्ण, राष्ट्र हितकारी संवाद को बढ़ावा देना और बौद्धिक ईमानदारी के साथ समकालीन प्रश्नों का उत्तर खोजना प्रज्ञा प्रवाह का प्रमुख उद्देश्य है। प्रोफ़ेसर अवधेश शर्मा ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह का उद्देश्य संगोष्ठियों, अध्ययन केंद्रों, संवाद के माध्यम से राष्ट्रीय बौद्धिक चेतना को जागृत करना है। अपने संबोधन में विद्याभवन महिला महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉक्टर पूजा तिवारी ने कहा कि हर व्यक्ति को बंकिम चंद्र चटर्जी के आनंद मठ को पढ़ना चाहिए ताकि वंदे मातरम् के मूल भाव को समझ सके।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रबंधन विशेषज्ञ शांतानंद मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मां की प्रतिष्ठा सदैव रही है। अपने संस्कृति और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा भाव रखने की आवश्यकता है। साथ ही, समकालीन विषयों की तार्किक और तथ्यात्मक विश्लेषण समाज की बड़ी आवश्यकता है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉक्टर प्रजापति त्रिपाठी ने कहा कि समाज में सकारात्मक, तथ्यात्मक विचार विमर्श की आवश्यकता आज संजीदगी से महसूस की जा रही। चेतना के प्रयास सराहनीय है।
इस अवसर पर विभाग कार्यवाह सारण प्रभात रंजन, अनुराधा गुप्ता, ताप्ती वर्मा, पूनम त्रिपाठी, अंजनी पांडेय, डॉक्टर पूजा तिवारी, डॉक्टर रीता शर्मा, डॉक्टर पूजा गुप्ता, प्रेमशंकर सिंह, शंकर पांडेय, मीनाक्षी सिंह, आशुतोष कुमार, रामबाबू यादव, रश्मि गिरी, लक्ष्मीकांत पांडेय, अवधेश द्विवेदी, रमाकांत द्विवेदी, प्रकाश चंद्र द्विवेदी, अवधेश कुमार, संजय कुमार, क्षमा शर्मा, सतीश कुमार, विनोद कुशवाहा, अरविंद कुमार आदि प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
