संस्कृत के प्रकांड विद्वान व महान ज्योतिषाचार्य पंडित राम यतन ओझा अपने ही घर में हो गए हैं गुमनाम
ज्योतिषाचार्य पंडित राम यतन ओझा द्वारा लिखित पुस्तकें तथा पांडुलिपि की कोई सहेज नहीं रहा
श्रीनारद मीडिया, मांझी, सारण (बिहार):

विश्व पंचांग के रचयिता तथा यूपी के वाराणसी में स्थापित देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान बीएचयू के संस्थापक सदस्य एवम संस्कृत के प्रकांड विद्वान व महान ज्योतिषाचार्य पंडित राम यतन ओझा अपने ही घर में गुमनाम हो गए हैं ।
स्व.ओझा द्वारा अपनी जन्मभूमि मांझी के डुमरी गांव में निर्मित हवेली दशकों से वीरान पड़ा हुआ है। बीएचयू के निर्माण में पंडित मदन मोहन मालवीय के समक्ष तथा उनके अनन्य सहयोगी रहे स्व ओझा ने अपनी हस्तलिखित विश्व पंचांग समेत दर्जनों पुस्तकों की रॉयल्टी बीएचयू को दान करके एक मिशाल कायम किया था।

बिहार सरकार के पूर्व वित्त राज्यमंत्री स्व डॉ प्रभुनाथ सिंह तथा तत्कालीन ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रो रबीन्द्र नाथ मिश्रा के सौजन्य से वर्ष 2004 में डुमरी में आयोजित जन्मशती समारोह में जेएनयू के केदार नाथ सिंह तथा नामवर सिंह सरीखे दर्जनों महान विद्वान जुटे थे। समारोह में स्व ओझा का स्मारक स्थल निर्माण के साथ साथ उनके भवन को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी।
हालांकि 22 वर्ष गुजर जाने के बाद भी उक्त घोषणा पर अमल नही किया जा सका है। सब ओझा के पौत्र व शिक्षक ओम प्रकाश ओझा, पूर्व प्राचार्य रघुनाथ ओझा एवम मुनु पाण्डेय आदि ने स्मारक निर्माण में सरकारी उदासीनता की चर्चा करते हुए दावा किया कि स्व ओझा के पांच दशक से बन्द पड़े एक कमरे में उनके द्वारा लिखित पुस्तकें तथा पांडुलिपि आदि मौजूद हैं।
जिनकी खोज खबर तथा उनके परिजनों के दर्द पर मरहम लगाने आज तक कोई सरकारी पदाधिकारी अथवा नेता नही आया। परिजनों ने स्व ओझा की कृतियों को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की मांग की।
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