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होर्मुज से 30 मालवाहक जहाज भारत के लिए सुरक्षित निकले

होर्मुज से 30 मालवाहक जहाज भारत के लिए सुरक्षित निकले

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क 

मिडिल ईस्ट से भारत आ रहे 30 जहाजों ने अब तक होर्मुज को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है, जबकि 26 जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने के लिए अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, शिपिंग मंत्रालय के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

अधिकारियों के मुताबिक, जलडमरूमध्य पार कर चुके 30 जहाजों में से लगभग आधे जहाजों पर एलपीजी और एलएनजी लदा हुआ था। इसके अलावा, आठ जहाजों पर थोक माल मौजूद था और सात कच्चे तेल के टैंकर थे।

ईरान-अमेरिका समझौते का असर

अधिकारियों ने बताया कि 1 मार्च से 17 जून के बीच 19 जहाजों ने इस समुद्री मार्ग को पार किया था। वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद से 11 जहाजों ने जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया है।

भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके या उनकी ओर बढ़ रहे इन 30 जहाजों में से 17 विदेशी झंडे वाले जहाज हैं, जिनमें सबसे अधिक पांच जहाज मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चल रहे हैं।

खाड़ी में मौजूद 26 जहाजों की स्थिति

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम फारस की खाड़ी में अभी भी भारतीय हितों से जुड़े 26 जहाज मौजूद हैं। इनमें भारतीय झंडे वाले और भारत आ रहे विदेशी झंडे वाले, दोनों तरह के जहाज शामिल हैं। इन 26 जहाजों में से तीन में ऊर्जा उत्पाद, 10 में उर्वरक और बाकी 13 जहाजों में अन्य प्रकार का माल लदा हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां से दुनिया भर की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। भारत के लिए यह मार्ग विशेष रूप से मायने रखता है, क्योंकि एलएनजी और एलपीजी की खरीद के लिए उसके प्रमुख व्यापारिक भागीदार खाड़ी देशों में ही स्थित हैं।

युद्ध, जहाज और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पिछले 3-4 महीनों में कई बार आपने इन विषयों पर खूब पढ़ा और सुना होगा। आपने जान लिया कि ये रास्ता दुनिया के समुद्री व्यापार के लिहाज से कितना महत्वपूर्ण है। ईरान के रास्ता रोकने के बाद से दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ा है इसके बारे में खबरें जरूर पढ़ी होंगी लेकिन अब बीमा कंपनी एलियांज द्वारा 100 दिन से अधिक चल रहे इस संघर्ष के बाद जहाजों और समंदर में फंसे सामानों का आंकड़ा सामने आया है।

1200 जहाजें और 125 अरब डॉलर का माल फंसा

फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने बीमा कंपनी एलियांज के अनुमानों के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान से जुड़े संघर्षों के शुरू होने के बाद से 100 दिनों से अधिक समय से जारी नाकाबंदी के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लगभग 125 अरब डॉलर मूल्य का माल ले जा रहे 1,200 से अधिक मालवाहक जहाज फंसे रह गए। हालांकि हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद ग्लोबल शिपिंग रूट में सुधार होना शुरू हो गया है। लेकिन अभी भी कई तरह की अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान 40 से अधिक जहाजों पर मिसाइलों का हमला हुई है। जिसमें से अधिकांश तेल के टैंकर थे। इसमें से 14 नाविकों ने अपनी जान भी गंवाई है।

आखिर इतना जरूरी क्यों है होर्मुज जलमार्ग?

आंकड़े बताते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष से पहले होर्मुज जलमार्ग से रोजाना लगभग 135 जहाज गुजरते थे। इस संकरे जलमार्ग से विश्व के तेल और गैस भंडार का लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही है, जिससे यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक बन जाता है। ऊर्जा के परिवहन के अलावा दुनिया के कई एशियाई देशों का व्यापार इसी रास्ते से जुड़ा है, जिसमें भारत खास देशों में शामिल है।

भारत के लिए कितना जरूरी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

भारत दुनिया के बड़े निर्यातक देशों में शामिल है। भारत के मीट, फल-सब्जी और बासमती चावल के खरीदार ज्यादातर होर्मुज प्रायद्वीप से जुड़े देश हैं। इस रास्ते के बंद होने के बाद भारत के कई मालवाहक जहाज या तो रास्ता खुलने के इंतजार में रास्ते में फंसे रहे या कई शिपमेंट को कैंसिल करना पड़ा। बासमती चावल के ऑर्डर और कीमतों से भी कई बार समझौता करना पड़ा जिसके बाद एक्सपोर्टर्स को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा देश में डीजल, पेट्रोल और खाद के इंपोर्ट को लेकर समस्याएं सभी ने देख ली हैं। फिलहाल इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे शुरू हो रही है।

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