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निर्जला एकादशी व्रत कल , भगवान विष्णु की आराधना व दान का रहेगा विशेष महत्व

निर्जला एकादशी व्रत कल , भगवान विष्णु की आराधना व दान का रहेगा विशेष महत्व

श्रीनारद मीडिया, दारौंदा,सीवान (बिहार )।

सीवान जिले सहित दारौंदा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 25 जून, गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ निर्जला एकादशी व्रत मनाया जाएगा।

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वोत्तम माना गया है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
इस दिन व्रत और पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और भक्त भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाबली भीमसेन के आग्रह पर महर्षि वेदव्यास ने उन्हें केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने का उपदेश दिया था। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि श्रद्धालु पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में एक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से समस्त पापों का नाश होता है, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा अंत में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती हैं।

निर्जला एकादशी पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है।
निर्जला एकादशी पर दान करने योग्य वस्तुएं

जल:-
इस दिन जल का दान महादान माना जाता है। मान्यता है कि जल से भरा घड़ा मंदिर या जरूरतमंदों को देने से आय के रास्ते खुलते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

फल:-
भगवान विष्णु की पूजा के बाद फल का दान करना शुभ होता है। इससे अटका हुआ धन वापस मिलता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

सुहाग की सामग्रीः-
इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री का दान करें। इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इसके अलावा पीले वस्त्र, चने की दाल, और हल्दी का दान भी किया जा सकता है।

जूते-चप्पलः-
एकादशी के दिन छाता, जूते या चप्पल
का दान करने से जीवन में सुख-शांति आती है और व्यवसाय में सफलता मिलती।

इस दिन जल से भरा घड़ा, फल, पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, सुहाग की सामग्री तथा जरूरतमंदों को जूते-चप्पल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जलदान से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है, जबकि फल एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

श्रद्धालु इस पावन अवसर पर प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन कर व्रत का संकल्प लेंगे तथा अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण कर व्रत का समापन करेंगे।

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