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भारत अपनी एलएनजी आपूर्ति को सफलतापूर्वक कैसे बनाए रखा?

भारत अपनी एलएनजी आपूर्ति को सफलतापूर्वक कैसे बनाए रखा?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 11,000 से ज्यादा नाविकों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर एक ऑपरेशन शुरू किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएमओ के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने कहा कि यह ऑपरेशन ईरान, ओमान, इस इलाके के दूसरे तटीय देशों, अमेरिका और मैरीटाइम इंडस्ट्री के साथ मिलकर किया जा रहा है।

‘अच्छी तरह से कर ली गई जांच-पड़ताल’

डोमिंग्वेज ने कहा, “हमने जरूरी सुरक्षा गारंटी हासिल कर ली है और इन ऑपरेशन्स को सपोर्ट करने के लिए सुरक्षित नेविगेशन की शर्तों की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल कर ली है।” यह कदम उस अहम समुद्री रास्ते में महीनों तक आई रुकावट के बाद उठाया गया है, जिसे 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने बंद कर दिया था।

होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर विवाद

भले ही जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर से शुरू हो रही है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर असहमति बनी हुई है। संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फिर से कहा कि किसी भी अंतिम समझौते के तहत ईरान को इस जलमार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों पर टोल लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

रुबियो ने कहा, “यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल या फीस वसूलने की इजाजत नहीं है।” हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ का कहना है कि भविष्य में रुकावटों को रोकने के लिए बातचीत के रास्ते बनाने के समझौतों के बावजूद होर्मुज कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं लौटेगा।

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी रहने के साथ ही नियंत्रण, आवाजाही के अधिकार और संभावित ट्रांजिट शुल्क का मुद्दा विवाद का मुख्य बिंदु बने रहने की उम्मीद है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और हार्मुज जलमार्ग के बंद होने से भारी उथल पुथल के बावजूद भारत ने अपनी एलएनजी आपूर्ति को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। विश्व की चौथी सबसे बड़ी एलएनजी खरीदार भारत ने विविध स्रोतों से आयात बढ़ाकर आपूर्ति बाधा को कम कर दिया, लिहाजा देश के भीतर उतनी संकट पैदा नहीं हुई जितना कि हो सकती थी।

वैश्विक आर्थिक शोध संस्थान एसएंडपी ग्लोबल इनर्जी की तरफ से 23 जून, 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, हार्मुज जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक एलएनजी आपूर्ति में करीब 17 फीसद की कटौती हुई, लेकिन अप्रैल-मई के माह में भारत का एलएनजी आयात लगभग सामान्य स्तर पर ही रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय आयात में अप्रैल में मात्र 5 फीसद व मई में दो फीसद की गिरावट हुई है। रिपोर्ट में इसके लिए विभिन्न स्रोतों से आयात करने की नीति को सबसे बड़ा कारण बताया गया है। भारत ने ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाकर जोखिम को कम किया।

भारत की नीति वैश्विक अनिश्चितता के समय ऊर्जा सुरक्षा के लिए मिसाल

एसएंडपी ग्लोबल इनर्जी के प्रमुख शोध कर्ता जोहन उतामा ने बताया कि, “विभिन्न स्रोतों से एलएनजी लेने की भारत इस विविधीकृत रणनीति को भविष्य में भी बनाए रख सकता है, जो लंबी अवधि की सोर्सिंग रणनीतियों को भी प्रभावित करेगा।” रिपोर्ट में भारत की तारीफ करते हुए कहा गया है कि इस तरह की नीति वैश्विक अनिश्चितता के समय ऊर्जा सुरक्षा के लिए मिसाल है।

इस शोध रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि होर्मुज जल मार्ग के पूरी तरह बाधित होने के बावजूद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर वैसा प्रभाव नहीं हुआ जैसा कि खतरा था।

कच्चे तेल का उत्पादन 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन घटा

हार्मुज संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में कच्चे तेल का उत्पादन 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन घट गया था। लेकिन चीन और जापान की तरफ से कच्चे तेल के आयात में कमी करने और अमेरिकी आपूर्ति में वृद्धि के कारण कीमतों पर दबाव सीमित ही रहा। मार्च और अप्रैल की शुरुआत में कीमतें बढ़ीं, लेकिन उसके बाद गिरावट आई।

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