मोहिनी एकादशी आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है पुण्य
श्रीनारद मीडिया, दारौंदा, सीवन (बिहार )
सीवन जिला सहित दारौंदा प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल सोमवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जायेगा।
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर में कुल 24 एकादशी आती हैं, लेकिन अधिकमास के कारण इस वर्ष कुल 26 एकादशी पड़ रही हैं। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है और इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत कलश प्राप्त हुआ, तब उसे राक्षसों से बचाकर देवताओं को प्रदान करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। इसी दिव्य अवतार की स्मृति में मोहिनी एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है तथा पापों से मुक्ति मिलती है।
मोहिनी एकादशी के दिन श्रद्धालुओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, अक्षत और लाल पुष्प लेकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। व्रत रखने वाले भक्त भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उन्हें पुष्प समर्पित करें।
पूजा में भगवान विष्णु को पीला चंदन, पुष्प, माला, अक्षत और भोग अर्पित किया जाता है। घी का दीपक और धूप जलाकर विष्णु मंत्र, एकादशी व्रत कथा तथा विष्णु चालीसा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती कर क्षमा प्रार्थना की जाती है।
श्री विष्णु मंत्र –
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।ॐ नमो नारायणाय।शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्। लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देवा देवा।ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
दिनभर फलाहार व्रत रखने के बाद अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।