अब CO बताएंगे, जमीन विवादित है या ठीक?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में जमीन खरीदने से पहले ग्राहक के लिए सरकार यह पता लगाने की व्यवस्था शुरू करने जा रही है कि उस जमीन पर कोई झंझट या विवाद तो नहीं है। जमीन का मालिकाना हक उसी के नाम पर है, जिससे जमीन लेने की तैयारी है या उसके स्वामित्व के दावे में कोई गड़बड़ी है। इससे जमीन की खरीद-बिक्री के बाद होने वाले विवाद में स्वतः कमी आने की संभावना है। सरकार इसके लिए जमीन खरीदने-बेचने की प्रक्रिया से पहले 13 तरह की जानकारी के साथ ऑनलाइन आवेदन लेगी और अंचल पदाधिकारी को 10 दिन के अंदर उसके तथ्यों की जांच करके बताना होगा कि जमीन का दिया गया सारा विवरण सही है।
रैयती जमीन के निबंधन से पहले खरीदारों को जमीन के बारे में पूरी जानकारी जल्द मिलने लगेगी। सरकार के दो महकमों राजस्व एवं भूमि सुधार और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है। सभी अंचल पदाधिकारियों (सीओ) को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। जमीन के निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार कर ली गई है। इसी महीने से राज्य में इसकी शुरुआत होने की संभावना है। अब जमीन की रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी।
बिहार सरकार के सात निश्चय-3 योजना के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। 16 फरवरी को ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि पूर्ण जानकारी के अभाव में जमीन रजिस्ट्री होने से अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। इसके बाद ही निर्णय लिया गया था कि पक्षकार चाहें तो उनको संबंधित भूमि के बारे में आधिकारिक जानकारी दी जाएगी।
जिस जमीन की रजिस्ट्री होनी है, आवेदकों को उसके लिए पोर्टल पर निबंधन कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा, भूमि का रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक का नाम, क्रेता, विक्रेता का नाम आदि बताना होगा। अंचलाधिकारी जांच-पड़ताल कर 10 दिनों में आवेदक को पूरी जानकारी एसएमएस से मुहैया कराएंगे। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने कहा कि जमीन निबंधन के पहले खरीदारों को इससे संबंधित पूरी जानकारी जल्द ही मिलने लगेगी। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मोबाइल यूनिट भी तैयार कर ली गई है।
जमीन विवाद में मर्डर के मामलों में बिहार टॉप पर
इस व्यवस्था को बिहार के लिहाज से अहम माना जा रहा हैं. क्योंकि जमीन विवाद के मामले में सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं बिहार में ही होती हैं. एनसीआरबी के आंकड़े भी कुछ ऐसी ही सच्चाई बयां करते हैं. साल 2024 में 2787 में 424 मर्डर के मामले में जमीन विवाद ही वजह रही. इस मामले में बिहार पहले, ओडिशा दूसरे और यूपी तीसरे नंबर पर है. विभाग को उम्मीद है कि नई पहल से इन आंकड़ों में कमी आएगी.
व्यवस्था में चुनौतियां भी कम नहीं
इस नई व्यवस्था के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं. बिहार में आखिरी लैंड सर्वे 1970-71 में हुआ. अनुमान के मुताबिक, करीब 70 फीसदी रैयतों की जमीन उनके पूर्वजों के नाम पर है. ऐसे में जमीन बेचने का विक्रेता का नाम कुछ और होता है और जमीन बेचने वाले लोग कोई और. यानी दादा और पिता की जमीन का सौदा उनके पौते और बेटे करते हैं. कई जानकारों का मानना है कि बिना सर्वे के यह पहल नाकाफी होगी. इसका असर बड़े पैमाने पर नहीं दिखेगा.
