टीबी से मृत्यु दर में रिकॉर्ड गिरावट, ट्रीटमेंट की सफलता दर ने पेश की मिसाल
मृत्यु दर न्यूनतम स्तर पर, 68 मरीजों में 1 की मौत
श्रीनारद मीडिया, विक्की बाबा, मशरक, सारण (बिहार):

मशरक में टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ चल रहे अभियान के बेहद सुखद और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। हालिया आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सटीक पहचान और समय पर उपचार से इस जानलेवा बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।
मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में टीबी से मृत्यु दर 3.7 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी। लगातार प्रयासों, बेहतर निगरानी तंत्र और दवा की नियमित उपलब्धता के कारण वर्ष 2024 में यह घटकर मात्र 2.1 प्रतिशत रह गई है। यह लगभग 43 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। वर्तमान स्थिति में औसतन 68 मरीजों में 1 की मृत्यु हो रही है, जो पहले की तुलना में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
चिकित्सक ने दी जानकारी
वरीय चिकित्सक डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और खांसने-छींकने से फैलता है। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत मुफ्त जांच और दवा उपलब्ध कराई जाती है। मरीजों को पूरा कोर्स नियमित रूप से लेना अनिवार्य है।
सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि
राज्य स्तर पर ड्रग-सेंसिटिव टीबी के इलाज की औसत सफलता दर अब 86.9 प्रतिशत (लगभग 87%) तक पहुंच गई है। वर्ष 2020 में यह दर 80 प्रतिशत थी, जो अब लगातार बढ़ी है।
सारण जिले के मशरक में राज्य औसत से बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया है। दवाओं की नियमित आपूर्ति, मरीजों की सघन ट्रैकिंग और निक्षय पोषण योजना जैसी पहलों ने इलाज को अधिक प्रभावी बनाया है।
भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मृत्यु दर का 2.1 प्रतिशत तक आना और सफलता दर का 87 प्रतिशत के करीब पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि राज्य टीबी मुक्त लक्ष्य की ओर मजबूती से अग्रसर है। सामुदायिक जागरूकता में वृद्धि से मरीज अब बिना डर समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं।स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि टीबी के लक्षण दिखने पर जांच अवश्य कराएं और उपचार बीच में न छोड़ें।
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