भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सेअर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के ऐलान के बाद अब जल्द ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को दूसरा बड़ा बूस्टर मिल सकता है। आगामी 23-24 जून को यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रिर भारत आ रहे हैं और इस दौरान अमेरिका के साथ पहले चरण के व्यापार समझौते से जुड़े दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
ग्रिर वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक करने वाले हैं। दोनों देशों के बीच पहले चरण के व्यापार समझौता करने को लेकर गत फरवरी माह में ही सहमति बन चुकी थी।
अंतिम चरण में ट्रेड डील
समझौते पर हस्ताक्षर के लिए अंतिम दस्तावेज तैयार करने का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अमेरिका भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है और देश का 20 प्रतिशत निर्यात अमेरिका में ही होता है।
व्यापार समझौता होने से अमेरिका में रोजगारपरक सेक्टर के निर्यात को मात्र एक से दो साल में दोगुना किया जा सकता है जिससे मैन्यूफैक्चरिंग और रोजगार दोनों में इजाफा होगा।
विदेश व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल मई में देश के वस्तु निर्यात में 18 प्रतिशत का इजाफा हुआ, लेकिन अमेरिका होने वाले निर्यात में पिछले साल मई की तुलना में 0.10 प्रतिशत की गिरावट रही।
अप्रैल व मई को मिलाकर वस्तु के कुल निर्यात में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इस दो महीनों में अमेरिका होने वाले निर्यात में मात्र 0.50 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
पिछले साल अप्रैल से अमेरिकी की तरफ से टैरिफ का खेल शुरू होने के बाद से भारत वैकल्पिक बाजार की तलाश में जोर-शोर से जुट गया और अब दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, सिंगापुर, चीन जैसे देशों में भारतीय निर्यात जबरदस्त तरीके से बढ़ रहे हैं।
समझौते से निर्यात 25 अरब डॉलर बढ़ सकता है
अब सिर्फ मखाना और लीची ही नहीं, गुड़ और बिस्कुट का भी निर्यात किया जा रहा है। पहले एक-दो देशों में इस प्रकार के आइटम का निर्यात होता था जो अब कई देशों में हो रहा है। जानकारों का कहना है कि भारत के पास निर्यात करने के लिए कई नए बाजार और कई नए आइटम है।
ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हो जाता है और अमेरिकी बाजार में प्रतिद्वंद्वी देश पर शुल्क के मामले में भारतीय वस्तुओं को बढ़त मिल जाती है तो एक साल में अमेरिका होने वाले निर्यात में 25 अरब डालर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
ईरान-अमेरिका के बीच समझौते का ऐलान और होर्मुज के खुलने से कच्चे तेल की कीमत मंगलवार को 80 डालर प्रति बैरल से नीचे आ गई। तेल के साथ गैस की सप्लाई सुगम होने जा रही है।
वहीं पश्चिम एशिया के देशों में अब पहले की तरह माल भेजा और मंगाया जा सकेगा जिससे खाद की कीमत कम होगी और निर्यात बढ़ेगा। यह सब भारत के लिए राहत की बात है जिसे भारतीय विकास की गति तेज होगी।
मई 2026 – देशवार निर्यात वृद्धि प्रतिशत
| देश (Country) | वृद्धि प्रतिशत (%) |
|---|---|
| अमेरिका (USA) | -0.10% |
| यूएई (UAE) | 3.8% |
| सिंगापुर (Singapore) | 69% |
| चीन (China) | 25% |
| ब्रिटेन (UK) | 10% |
| तंजानिया (Tanzania) | 196% |
| दक्षिण अफ्रीका (South Africa) | 116% |
| श्रीलंका (Sri Lanka) | 150% |
| इटली (Italy) | 87% |
| दक्षिण कोरिया (South Korea) | 71% |
| स्पेन (Spain) | 56% |
| वियतनाम (Vietnam) | 41%
|
- यह भी पढे………………….
- केंद्र सरकार ने NEET UG परीक्षा के मद्देनजर टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई है
- आई०पी०एस हरिनारायणचारी मिश्र “ऑर्गेनिक कवच” वेलनेस सेंटर का रघुनाथपुर में करेगें उदघाटन
- ब्रह्मर्षि साहेब बाबा धाम सरयू तट ग्यासपुर से पंच दिवसीय सनातन धर्म यात्रा शुरू
- सीवान: असांव गांव में भाजपा मंडल अध्यक्ष सुबाष सिंह सहित 34 कार्यकर्ताओं ने दिया सामूहिक इस्तीफा
