सीवन जिला सहित दारौंदा प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि का पावन व्रत रखा जाएगा। इसके एक दिन पूर्व 16 मार्च को संतान प्राप्ति की कामना के लिए सोमप्रदोष व्रत किया जाएगा, जिसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला व्रत माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान सुख की कामना करेंगे।
इसी क्रम में आज प्रातः 7:51 बजे तक त्रयोदशी तिथि और शतभिषा नक्षत्र के संयोग से वारुणी पर्व का विशेष योग बन रहा है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस योग में पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ संयोग में गंगा स्नान करने से मनुष्य को करोड़ों सूर्यग्रहण के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन भगवान शिव के सानिध्य में गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना करता है, उसे मृत्यु के बाद प्रेतयोनि का भय नहीं रहता और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस कारण देशभर के विभिन्न तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
मासिक शिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में भी विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फल अर्पित कर व्रत रखेंगे तथा शिव मंत्रों का जाप और भजन-कीर्तन करेंगे।
वहीं 16 मार्च को पड़ने वाले सोमप्रदोष व्रत का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से संतान प्राप्ति, दांपत्य सुख और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर संध्या समय प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करेंगे।