10 लाख की हाईटेक मशीनों से चंद सेकंड में उड़ाते थे लग्जरी कारें
GPS ट्रैकिंग भी कर देते थे फेल; रोहिणी पुलिस ने अंतरराज्यीय गैंग का किया भंडाफोड़
राजधानी दिल्ली पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
श्रीनारद मीडिया, सेंट्रल डेस्क:

दिल्ली में लग्जरी कारों की चोरी करने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय ऑटो लिफ्टर गैंग का रोहिणी जिले की स्पेशल स्टाफ ने पर्दाफाश किया है। गैंग के सदस्य करीब 10 लाख रुपये कीमत की आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों और सॉफ्टवेयर की मदद से कुछ ही सेकंड में कारों की डुप्लीकेट चाबी तैयार कर वाहन चोरी कर लेते थे। इतना ही नहीं, गाड़ियों में लगे GPS ट्रैकिंग सिस्टम का भी तुरंत पता लगाकर उसे निष्क्रिय करने की तैयारी रखते थे, जिससे पुलिस के लिए चोरी की गाड़ी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस ने इस गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें अलीपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर कुलदीप उर्फ लक्की भी शामिल है, जिसे इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोपियों के कब्जे से 11 हाई-एंड चोरी की कारें, एक चोरी का ऑटो, 50 इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्रामिंग चाबियां, कंप्यूटराइज्ड की-कटिंग मशीन, टैबलेट, कंप्यूटर सिस्टम, GPS डिटेक्टर, फर्जी नंबर प्लेटें और अन्य हाईटेक उपकरण** बरामद किए गए हैं।
जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। दिन के समय आरोपी बलविंदर उर्फ बिंदा दिल्ली और आसपास के इलाकों में घूमकर ऐसी महंगी कारों की रेकी करता था, जो रात में सुनसान स्थानों पर पार्क होती थीं। इसके बाद वह गाड़ियों की पूरी जानकारी मास्टरमाइंड कुलदीप तक पहुंचाता था।
कुलदीप अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक की-प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर, कंप्यूटराइज्ड की-कटिंग मशीन और डिजिटल उपकरणों की मदद से उसी मॉडल की डुप्लीकेट स्मार्ट-की तैयार कर देता था। रात के समय आरोपी बिना शीशा तोड़े और बिना लॉक क्षतिग्रस्त किए कार का लॉक खोलते और आराम से वाहन लेकर फरार हो जाते। चोरी के दौरान वे चेहरा छिपाने के लिए मास्क पहनते थे और GPS डिटेक्टर से यह भी जांचते थे कि वाहन में ट्रैकिंग सिस्टम सक्रिय है या नहीं।
पुलिस के मुताबिक, चोरी के बाद महंगी कारों को दूसरे राज्यों के रिसीवरों को बेच दिया जाता था, जबकि अन्य वाहनों को गुप्त ठिकानों पर ले जाकर उनके इंजन, गियर बॉक्स, ECU, अलॉय व्हील, हेडलाइट, दरवाजे और अन्य महंगे पार्ट्स निकालकर ग्रे मार्केट में बेच दिए जाते थे। इन पार्ट्स को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए आरोपी चोरी के ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो।
डीसीपी शशांक जायसवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क और चोरी के वाहनों के खरीददारों की पहचान की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से वाहन चोरी के कई अन्य मामलों का भी खुलासा होगा।
दिल्ली पुलिस
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