जल्दी आकर देर से क्यों विदा हुआ मानसून?

जल्दी आकर देर से क्यों विदा हुआ मानसून?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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चार महीने तक वर्षा देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार देश से पूरी तरह विदा हो गया है। इस वर्ष मानसून ने केरल में 24 मई को दस्तक दी थी, जोकि 2009 के बाद सबसे पहले आगमन था। आमतौर पर मानसून एक जून को केरल पहुंचता है और आठ जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।

लेकिन इस बार यह पूरे देश में आठ जुलाई की सामान्य तिथि से नौ दिन पहले ही छा गया और एक दिन देर से विदा हुआ। यानी सक्रियता लंबी रही और बारिश भी आठ प्रतिशत ज्यादा देकर लौटा। कुछ इलाकों में बाढ़ की तबाही तो कहीं सूखे की स्थिति रही।

देशभर में औसतन 937.2 मिमी वर्षा हुई

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और उत्तर-पूर्व मानसून के आगमन की घोषणा साथ-साथ कर दी है क्योंकि इसी दिन उत्तर-पूर्वी मानसून ने देश के दक्षिणी हिस्से में दस्तक दी है। इस तरह वर्षा के एक चक्र का समापन एवं दूसरे की शुरुआत एक ही दिन हुई।

कृषि मंत्रालय ने इस बार के मानसून को संतुलित और अनुकूल बताया है। चार महीने के मानसून मौसम (एक जून से 30 सितंबर) के बीच देशभर में औसतन 937.2 मिमी वर्षा हुई, जोकि सामान्य 868.6 मिमी से करीब आठ प्रतिशत अधिक है। हालांकि यह बारिश असमान रूप से हुई है यानी कहीं ज्यादा तो कहीं कम हुई। देश के उत्तर-पश्चिम हिस्से में 27.3 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जो वर्ष 2001 के बाद सबसे ज्यादा है।

मध्य भारत में 15 प्रतिशत और दक्षिणी हिस्से में लगभग 10 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। इसके विपरीत पूर्व और उत्तर-पूर्व हिस्से में सामान्य से 20 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो 1901 के बाद दूसरा सबसे कम आंकड़ा है। इस क्षेत्र में 1,089.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की, जो कि 1,367.3 मिलीमीटर की सामान्य मात्रा से काफी कम है।

पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड में मचाई तबाही

इस वर्ष के मानसून को पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश के लिए भी जाना जाएगा। पंजाब में बाढ़ और अतिवृष्टि से हजारों हेक्टेयर फसलें डूब गईं। पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन से जन-धन की हानि हुई। पुल, सड़कें एवं मकान बह गए। हालांकि कई राज्यों में पर्याप्त वर्षा से किसानों को फायदा हुआ।

जलाशयों में जलस्तर सामान्य से ऊपर आ गया है, जिससे रबी फसलों की बुआई में सहूलियत होगी। समग्रता में यह मौसम कृषि, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए राहतभरा रहा है। अब दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी वर्षा की बारी है, जो आने वाले महीनों में जल संकट कम करने और रबी मौसम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

मौसम विभाग ने बताया, इसी समय पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे में दस्तक दे चुका है.

24 मई को केरल पहुंचा था मानसून

इस साल मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था जो 2009 के बाद से सबसे जल्दी आगमन था. यह 2009 में 23 मई को भारत पहुंचा था. मानसून ने आठ जुलाई की सामान्य तिथि से नौ दिन पहले पूरे देश को कवर कर लिया. मानसून पूरे भारत में 2020 के बाद सबसे जल्दी पहुंचा है. मानसून ने 2020 में 26 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया था. मानसून आमतौर पर एक जून तक केरल में प्रवेश करता है और आठ जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है. यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापस जाना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से चला जाता है.

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 1901 के बाद दूसरी बार सबसे कम हुई बारिश

आईएमडी महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, ‘‘इस मानसून में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश 1901 के बाद से दूसरी बार सबसे कम रही. इस क्षेत्र में मानसून के दौरान सबसे कम बारिश (1065.7 मिलीमीटर) 2013 में दर्ज की गई थी. अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में वर्षा में कमी आई है.”

पश्चिमोत्तर भारत में सामान से 27.3 प्रतिशत अधिक बारिश

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमोत्तर भारत में 747.9 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य बारिश से 27.3 प्रतिशत अधिक है. महापात्र ने कहा कि यह 2001 के बाद से सबसे अधिक और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक बारिश है. उन्होंने बताया कि क्षेत्र के सभी जिलों में जून, अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई.

पंजाब में सबसे भीषण बाढ़

पंजाब में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ आई तथा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं जम्मू कश्मीर में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आईं, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए. मध्य भारत में 1125.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य बारिश से 15.1 प्रतिशत अधिक है जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में 9.9 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई.

 

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