भारत और कनाडा के रिश्तों में आई एनर्जी-पीएम मोदी
दोबारा पटरी पर लौटेंगे भारत-कनाडा से संबंध
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत में स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत और कनाडा के बीच संबंधों में एनर्जी आई है। कनाडा के पीएम कार्नी चार दिन के भारत दौरे पर हैं। पीएम मोदी ने अपने कनाडाई समकक्ष के साथ साझा बयान के दौरान कहा, “दुनिया में बहुत कम लोग हैं जिनके सीवी में दो देशों में सेंट्रल बैंकिंग लीडरशिप शामिल है। हमारी पहली मीटिंग के बाद से हमारे रिश्ते में एनर्जी आई है, आपसी भरोसा और पॉजिटिविटी बढ़ी है।”
‘ट्रेड को 2030 तक 50 बिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य’
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि दोनों नेताओं ने इस विजन को अगले लेवल की पार्टनरशिप में बदलने पर चर्चा की। हमारा लक्ष्य 2030 तक ट्रेड में 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचना है। उन्होंने आगे कहा, “आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना हमारी प्राथमिकता है। इसलिए, हमने जल्द ही कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट को फाइनल करने का फैसला किया है। इससे दोनों देशों में नए निवेश और रोजगार के मौके बनेंगे।”
कौन-कौन सी डील हुईं साइन
भारत और कनाडा ने सोमवार को अपने रिश्तों को नया मोड़ देते हुए कई समझौता ज्ञापन पर साइन किए। प्रधानमंत्री मोदी और कार्नी की घोषणाओं के अनुसार, दोनों देशों ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग, रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने और जरूरी मिनरल्स और यूरेनियम सप्लाई पर सहयोग के लिए डील साइन की हैं।
मार्क कार्नी ने की तारीफ
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने अपने भाषण में भारत के साथ संबंधों के विस्तार की तारीफ की। उन्होंने कहा, “पिछले साल कनाडा और भारत की सरकारों के बीच इतना जुड़ाव हुआ है जितना दो दशकों से ज्यादा समय में नहीं हुआ।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत और कनाडा ने न सिर्फ रिश्तों को नया किया है, बल्कि नई उम्मीद, फोकस और दूर की सोच के साथ एक अहम पार्टनरशिप को बढ़ाया है। यह दो कॉन्फिडेंट देशों के बीच एक ऐसी पार्टनरशिप है जो भविष्य के लिए अपना रास्ता खुद बना रहे हैं।
दोबारा पटरी पर लौटेंगे भारत-कनाडा से संबंध
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में रिश्तों पर जमी बर्फ के बाद यह बैठक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में अहम कदम होगी । बैठक का फोकस वर्ष 2023 से पहले द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के लिए चल रही वार्ता प्रक्रिया, पहलों और संधियों को नए जोश और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ फिर से शुरू करने पर होगा।
दोनों पक्ष ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, परमाणु सहयोग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में संस्थागत संवाद तंत्र को पुनर्जीवित करने की हामी भरेंगे, द्विपक्षीय कारोबार के नए लक्ष्य तय करेंगे और आतंकवाद को लेकर एक-दूसरे की चिंताओं को समझने की कोशिश करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर बात
वैसे जनवरी, 2026 में गोवा में इंडिया इनर्जी वीक के दौरान भारत व कनाडा ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर फिर से बात की है। दोनों देशों के बीच सितंबर 2016 में ऊर्जा वार्ता की शुरुआत हुई थी, जिसे वर्ष 2018 में तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो की भारत यात्रा के दौरान विस्तारित किया गया था। लेकिन, बाद में यह भी द्विपक्षीय संबंधों में तनाव की भेंट चढ़ गई।
अमेरिका से चल रही तनातनी के बीच कनाडा अपने विशाल कच्चे तेल व गैस भंडार के खरीददार की तलाश में है और भारत से बेहतर उसे दूसरा कोई बाजार नहीं मिल सकता।
दोनों देशों के बीच नए सिरे से बातचीत होगी
सूत्रों ने बताया है कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नए सिरे से बातचीत शुरू होने जा रही है। वैसे जून 2010 में हस्ताक्षरित और सितंबर 2013 से लागू परमाणु सहयोग समझौते (एनसीए) के तहत शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग में सहयोग के लिए संयुक्त समिति गठित की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी की अप्रैल 2015 की कनाडा यात्रा के दौरान भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कामेको कारपोरेशन के बीच 2015 – 2020 के लिए यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ था।
10 वर्षीय नए अनुबंध को अंतिम रूप देने के करीब दोनों देश
सूत्रों के अनुसार अब दोनों पक्ष 10 वर्षीय नए अनुबंध को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जिससे भारत की दीर्घकालिक परमाणु ईंधन सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। प्रौद्योगिकी, दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष तीन ऐसे सेक्टर हैं जहां भारत व कनाडा के बीच सहयोग की नई संभावनाएं देखी जा रही हैं।
इस बार वार्ता को निश्चित समय सीमा और चरणबद्ध लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की योजना है, ताकि व्यापार और निवेश प्रवाह में ठहराव को दूर किया जा सके। दोनों देशों के बीच पहले भी इस बारे में बातचीत होती रही है, जो वर्ष 2023 के बाद बाधित है।
ट्रूडो के कार्यकाल में खराब हुए रिश्ते
वर्ष 2023 में तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि भारत सरकार उसके नागरिकों की हत्या कराने की साजिश रच रही है। यह आरोप खालिस्तान समर्थक आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के संदर्भ में लगाया गया था। भारत ने आरोप को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया था। कार्नी ने मार्च, 2025 में सत्ता संभाली और तब से लगातार संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश जारी है।
