पूज्य राजन जी के द्वारा श्रीराम कथा के करुण प्रसंगों पर नेत्र हो उठते हैं श्रद्धा से सजल
वीएम इंटर कॉलेज के प्रांगण में पूज्य राजन जी के श्रीमुख से लालित्यपूर्ण और रसमयी श्रीराम कथा होनी है
08 से 16 मार्च 2026 तक संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन होना है
✍️गणेश दत्त पाठक
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

“बिकल भरत देखि सब बामा। राम राम कहि रामहि रामा।।”
सिवान। श्रीराम कथा के दौरान जीवन के सम्पूर्ण भाव बेहद संजीदें अंदाज में उभरते रहते हैं। भय और करुणा ही मानवीय जीवन के सर्वप्रमुख भाव होते हैं। भय जहां नकारात्मकता का संचार करता है और समाज का विध्वंश करता है, वहीं करुणा का भाव सकारात्मकता का संचार करता है और संपूर्ण सृष्टि को एकीकृत करता दिखता है। ऐसे में जब पूज्य राजन जी महाराज श्रीराम कथा कहने के क्रम में विशेषकर राम भरत मिलाप, राजा दशरथ, कौशल्या माता, उर्मिला, मांडवी, जटायु, निषादराज की कथा जब सुनाते हैं तो मानवीय करुण संवेदनाएं तरंगित और झंकृत हो उठती हैं। आस्था की अश्रुधारा बहने लगती है और श्रद्धा से नयन सजल हो उठते हैं। लौकिक संसार में अलौकिक अनुभूति अविस्मरणीय बन जाती है।
सामान्य तौर पर मानव जीवन में करुणा वह संवेदनशील भावना होती है जो दूसरों के प्रति सहानुभूति, सामानुभूति और दया के भाव को दर्शाती है। यह मानवीय भावना की वह पराकाष्ठा होती है, जिसमें हम दूसरों के दुख और दर्द को संजीदगी से महसूस करते हैं। दूसरे के संघर्ष को समझते हैं और उनकी मदद करने के लिए प्रेरित होते हैं। श्रीराम कथा के दौरान लालित्यपूर्ण तरीके से संगीतमय अंदाज में जब पूज्य राजन जी महाराज करुणा के प्रसंगों का जिक्र करते हैं तो हर श्रद्धालु भावविभोर हो उठता है और कारुणिक भाव की चरम परिणति सजल नेत्र होते हैं।
“सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहु मुनिनाथ।
हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश, अपयश विधि हाँथ।”

श्रीराम कथा के दौरान जो करुण रस बहता है उसके मायने भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं जिन्हें समझे जाने की आवश्यकता अवश्य होती है। करुणा का भाव मानवता को एकीकृत करता है। एक दूसरे के दर्द को समझने का भाव समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देता है। जिससे मजबूती और समृद्धि समाज को मिलती है।
साथ ही करुणा के भाव का जागरण आज के तनाव के जिंदगी में सुकून और शांति की बयार भी बहाता है। इससे नैतिकता और आदर्श के मूल्यों को बढ़ावा मिलता है तथा समाज में सच्चाई और न्याय की स्थापना होती है। करुणा बोध ही जीवन में आध्यात्मिक विकास को सुनिश्चित करता है और जीवन की सार्थकता को साबित करता है।
सीवान में अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से श्री राम कथा का वाचन 8 मार्च से 16 मार्च तक वी एम इंटर कॉलेज के प्रांगण में होना है। आयोजक श्री राम कथा समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी और संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार का कहना है कि श्री राम कथा के श्रवण के लिए श्रद्धालु अधिक से अधिक संख्या में आएं और लालित्यपूर्ण, संगीतमई और रसमयी श्री राम कथा के आध्यात्मिक आनंद का पुण्यलाभ अर्जित करें।
