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नामांकन की आखिरी तारीख से पहले मतदाता सूची का विवाद सुलझ जायेगा

नामांकन की आखिरी तारीख से पहले मतदाता सूची का विवाद सुलझ जायेगा

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले ‘मतदाता सूची’ से नाम हटाये जाने के मामले की देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई हुई. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये. निर्वाचन आयोग (ECI) ने कोर्ट को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत हटाये गये मतदाताओं के 60 लाख दावों में से करीब 59 लाख का निपटारा सोमवार दोपहर तक ही कर दिया गया

ममता बनर्जी के वकील ने ट्रिब्यूनल पर उठाये सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में मतदाताओं के दावों के निपटारे की रफ्तार पर संतोष जताया, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील ने एक गंभीर मुद्दा उठा दिया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के लिए जो 19 विशेष न्यायाधिकरण (Tribunals) गठित किये गये थे, वे अभी तक सुचारु रूप से काम शुरू नहीं कर पाये हैं. इससे उन लोगों को परेशानी हो रही है, जो अपने नाम कटने को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं.

कोर्ट ने इस प्रगति को सकारात्मक बताते हुए कहा कि रोजाना लगभग 1.75 लाख से 2 लाख मामलों का निस्तारण किया जा रहा है, जो उत्साहजनक है। सभी करीब 60 लाख दावों पर 7 अप्रैल तक फ़ैसला कर लिया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से भेजे गए दो कम्युनिकेशन पर गौर किया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत उपलब्ध आंकड़ों और तथ्यों से काफी संतुष्ट और आशावादी है। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि चुनाव आयोग ने राज्य में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित कर दिए हैं। इन ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता पूर्व हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सौंपी गई है। ये ट्रिब्यूनल मतदाता सूची में नाम शामिल या बाहर किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई करेंगे।

ट्रिब्यूनल का काम जल्द

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल जल्द काम शुरू करेंगे और सदस्यों का ओरिएंटेशन पूरा होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत ने कहा कि नए दस्तावेजों को बिना उनकी सत्यता जांचे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को न्यायिक अधिकारियों, ट्रिब्यूनल सदस्यों और स्टाफ को मानदेय और अन्य खर्चों का समय पर भुगतान करने का निर्देश दिया।

बंगाल में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण

पत्र के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित किए गए हैं। इन न्यायाधिकरणों की अगुवाई कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस कर रहे हैं। अपीलीय न्यायाधिकरण में वो लोग जा सकते हैं, जिन लोगों के नाम दावे और आपत्ति के दौरान कट गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर में रोजाना हो रहे निपटारों की संख्या पर संतुष्टि जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि रोजाना पौने दो लाख से दो लाख तक आपत्तियों पर सुनवाई करके फैसला हो रहा है।

टीएमसी ने क्या कहा

हालांकि टीएमसी के वकील ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के दखल की आशंका जताई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बेबुनियाद मानते हुए नकार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि जब अपीलीय न्यायाधिकरण किसी के वोटर लिस्ट में होने या न होने का फैसला ले तो इसके पीछे का कारण भी एक कॉलम में दर्ज किया जाए। न्यायाधिकरण में सुनवाई के बाद जो अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, वो ये तय करेगी कि कोई व्यक्ति अपने वोट डालने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है या नहीं।

कल्याण बनर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

टीएमसी के वकील कल्याण बनर्जी ने बड़े पैमाने पर फॉर्म 6 जमा होने का मुद्दा उठाया। वकील कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि एक आदमी 30,000 फॉर्म-6 जमा कर रहा है। उन्होंने कहा कि अभी न्यायिक प्रक्रिया चल रही है लेकिन इसके बीच हजारों की संख्या में नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फॉर्म 6 जमा हो रहे हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह के संदेह पैदा करने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए। सीजेआई ने कहा कि हर बार होता है, पहली बार नहीं है। आप आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि कानून के मुताबिक नामांकन की आखिरी तारीख तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं।

कल्याण बनर्जी ने मांग की कि नए शामिल किए जाने वाले नामों को बूथवाइज बताया जाए ताकि ऑब्जेक्शन फाइल किए जा सकें। इस पर सीजेआई ने कहा कि सभी जजों की ट्रेनिंग आज पूरी हो जाएगी ताकि वे ऑनलाइन/ऑफलाइन फाइल की गई सभी अपील को देख सकें।

वहीं, पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की आशंका के मद्देनजर सनातनी संस्था ने याचिका दायर कर पूर्व चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में एक हाईलेवल मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की मांग की है। मांग की गई है कि कमेटी चुनावी हिंसा के मुद्दों को देख सके ताकि 2022 जैसे हालात दोबारा न हो सकें। सुप्रीम कोर्ट ने सनातनी संस्था की तरफ से पेश हुए वकील को याचिका की कॉपी सभी पक्षों को देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बंगाल एसआईआर पर होने वाली अगली सुनवाई के दौरान इस याचिका पर सुनवाई की जाएगी।

क्या है पूरा विवाद?

पश्चिम बंगाल में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच मतदाता सूची में ‘घुसपैठियों’ बनाम ‘वैध नागरिकों’ के नाम काटने के मुद्दे पर ठन गयी है. SIR प्रक्रिया के तहत लाखों नाम हटाये जाने के बाद पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे. अब सुप्रीम कोर्ट की इस सक्रियता के बाद उम्मीद जतायी जा रही है कि नामांकन की आखिरी तारीख से पहले मतदाता सूची का विवाद सुलझ जायेगा.

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