पुस्तक के स्वरूप में अपने भाव को व्यक्त करना कठिन कार्य है
संतानंद मिश्र जी ने अपनी पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी को उपकृत किया है
गांव एवं इसकी मिट्टी हमारे संस्कृतिक बोध की मूल है
✍🏻 राजेश पाण्डेय
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

“अल्प हुआ तो क्या हुआ
जैसे आंसू एक
समन्दर जैसा स्वाद है
तू चख के तो देख।”
जी हां, हमारे सीवान के लाल व उखई ग्राम वासी संतानंद मिश्र ने अपनी पुस्तक ‘गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ की रचना करके अपने समाज को उपकृत किया है। संतानंद मिश्र ने सीवान की प्रज्ञा को जीवंत बनाए रखने हेतु यह अथक कार्य किया है, जिसके लिए उनका गांव जाना जाता है। सनद रहे की उखई के ही खुदा बख्श खां साहब थे, जिन्होंने अपनी गिलहरी प्रयास से शोध के क्षेत्र में विश्व का सर्वश्रेष्ठ पुस्तकालय खुदा बख्श खां ओरिएंटल लाइब्रेरी, पटना में स्थापित किया, जिसकी देखरेख सरकारें करती हैं।

मूल रूप से सीवान नगर से सटे उत्तरी क्षेत्र, पचरुखी प्रखंड के उखई पश्चिम टोला के रहवासी आदरणीय त्रिलोकी नाथ मिश्रा जी के सुपुत्र संतानंद मिश्रा ने अब तक अपने जीवानुभव को पुस्तक का स्वरूप प्रदान किया है। उन्होंने पुस्तक की रचना करके नई पीढ़ी को कृतज्ञ किया है साथ ही सीवान जिले की बुद्धिजीवों के लिए एक चुनौती भी प्रस्तुत की है कि अगर यह आपका गांव, नगर व जिला है तो उसके प्रति आपका कुछ बोध है, इसने आपके निर्मित में आप अमूल्य योगदान दिया है, यहां की प्राथमिक शिक्षा, खेल-कूद, उत्सव-समारोह, सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों ने आपके जीवन में अहम योगदान दिया है, ऐसे में आपका कर्तव्य है कि आप अपने अनुभवों को पुस्तक का स्वरूप प्रदान करके नई पीढ़ी को अपने गांव- नगर से सम्बद्ध करें एवं उन्हें प्रेरित करें कि वह अपने क्षेत्र और जिले के लिए कुछ कर गुजर जाए।

गौरतलब है कि 5 अप्रैल दिन रविवार की संध्या सुंदरकांड पाठ एवं पुस्तक विमोचन का समारोह संतानंद मिश्र जी के ग्राम उखई पश्चिम टोला में स्थित आवास परिसर में संयोजित हुआ जिसमें जिले भर के नामचीन विभूतियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

संगातमयी सुंदरकांड पाठ के बाद संक्षिप्त विमोचन समारोह में पुस्तक का समारोह में लोकार्पण किया गया। उक्त समारोह का संचालन नगर के वरीय अधिवक्ता डॉ. विजय कुमार पांडेय ने किया। जिसमें वक्ता के तौर पर शिक्षाविद डॉक्टर गणेश दत्त पाठक, पूर्व सांसद ओम प्रकाश यादव, वरीय पत्रकार कृष्ण कुमार सिंह, जेड.ए इस्लामिया महाविद्यालय में हिंदी विभाग के पूर्व व्याख्याता डॉ. अशोक प्रियम्बद ने पुस्तक में उकेरे गए शब्दों से निर्मित वाक्य विन्यास से उत्पन्न भाव विश्लेषण के कई आयामों को प्रस्तुत किया।

समारोह निश्चित तौर पर उत्सव में बदल गया था। संतानंद मिश्र अपनी वृति में नवाचार हेतु अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में प्रवास करते हैं। परन्तु अपने गांव और जिले से आपका जुड़ाव अभूतपूर्व है। आपके मन-मस्तिष्क में अपने गांव और जिले के लिए कई योजनाएं हैं जो समय-समय पर फलीभूत होती रहती हैं।
