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उपन्यास वास्तविकता से रूबरू करवाता है

उपन्यास वास्तविकता से रूबरू करवाता है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

फ्रेंज काफ्का की उपन्यास ‘द मेटामॉर्फोसिस ‘ पढ़ी। ये किताब मेरे पास काफी दिनों से रखी थी लेकिन मैं इसे पूरीतरह भूल चुकी थी। मै ज्यादातर हिंदी नॉवेल्स पढ़ती हूं क्योंकि ये समझने में आसान होती हैं और किसी शब्द पर आपको रुकना नहीं पड़ता। लेकिन आज इस छोटी सी नॉवेल को पढ़कर मै पूरीतरह हिल गई।इस किताब का मुख्य पात्र ग्रेगोर सैमसा है। जो अपने परिवार के साथ रहता है जिसमें उसके अलावा उसके मां पिता और बहन है।

ग्रेगोर सैमसा एक घुमंतू विक्रेता है। एक दिन ग्रेगोर सैमसा की नींद खुली तो उसने पाया कि वह एक विशालकाय कीड़े में बदल गया है।और यही से कहानी की शुरूआत होती है। वह बिस्तर पर लेटा हुआ अपने नीरस जीवन के बारे में सोचने लगता है। अचानक उसे एहसास होता है कि वह ज़्यादा सो गया है और काम पर जाने में देर हो जाएगी। वह सोच ही रहा था तभी उसकी माँ ने दरवाज़ा खटखटाया।

ग्रेगर की बहन ग्रेटे उससे दरवाज़ा खोलने की गुहार लगाती है। जब वह बिस्तर से उठने की कोशिश करता है, तो उसे एहसास होता है कि वह उठ नहीं सकता। ग्रेगर को दरवाज़े पर अपने ऑफिस मैनेजर की आवाज़ सुनाई देती है, जो उसके बारे में पूछ रहा होता है। ग्रेगर किसी तरह अपना शरीर बिस्तर से लुढ़काकर ज़मीन पर आ जाता है। वह किसी तरह आवाज़ देकर बताता है कि वह थोड़ी देर में बाहर आ जाएगा।

ऑफिस मैनेजर नाराज़ हो जाता है और उसे काम से छुट्टी लेने के परिणामों के बारे में चेतावनी देता है। वह यह भी कहता है कि ग्रेगर अपने मालिकों को संतुष्ट करने में नाकाम रहा है। ग्रेगर विरोध करता है, लेकिन कोई भी उसके शब्दों को समझ नहीं पाता। वे मान लेते हैं कि वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया है।

आखिर किसी तरह ग्रेगोर दरवाजा खोलने में कामयाब हो जाता है। उसे इस बदले हुए रूप में देखकर उसकी माँ तुरंत बेहोश हो जाती है। ऑफिस मैनेजर भाग जाता है। जब ग्रेगोर उसका पीछा करता है। तभी उसके पिता सामने आ जाते है जो उसे छड़ी और अखबार की मदद से वापस कमरे में ले जाते हैं। और वह सो जाता है।

जब ग्रेगोर की नींद खुलती है तो भूख से व्याकुल ग्रेगोर अपने कमरे में दूध और रोटी देखता है। लेकिन उसे दूध पीने का मन नहीं होता। हद तो तब होती है जब उसकी बहन अगले दिन उसके लिए दूध की जगह सड़े हुए खाने के टुकड़े रख देती है जिन्हें वह झटपट खा जाता है। कहानी कई जगह दर्दनाक मोड लेती है। हमेशा से सबका प्रिय कमाऊ लड़का आज अचानक सबको अप्रिय हो जाता है।

जब उसकी बहन उसका कमरा साफ़ साफ करने आती है तब उसका सोफे के नीचे छिप जाना,इस डर से कि कहीं वह उसे डरा न दे। यह एक नियमित प्रक्रिया बन जाती है।

एक पहलू सबसे दिलचस्प लगा। शुरुआत में, चार लोगों का परिवार अपना गुजारा चलाने के लिए सिर्फ ग्रेगर की कमाई पर निर्भर था। उसी के सहारे जी रहा था। जब वह एक कीड़े में बदल जाता है और काम करने में असमर्थ हो जाता है, तो परिवार को नौकरी करनी पड़ती है। वे ग्रेगर से बहुत नाराज़ होते हैं क्योंकि वही अकेला कमाने वाला था जिससे पूरे परिवार का सुखमय जीवन चलता था। उसकी माँ और बहन सुंदर कपड़े खरीदती थीं और उसके पिता सारा दिन घर पर बैठे रहते थे। अब अचानक उन्हें ग्रेगर की देखभाल करनी पड़ती है और वे थोड़ी सी देखभाल करने से भी बहुत नाराज़ होते हैं। यहाँ तक कि जब वह खाना बंद कर देता है और धीरे-धीरे मरने लगता है तो उन्हें कोई परवाह भी नहीं रहती।

कहानी का अंत ग्रेगोर की मृत्यु के साथ होता है और उसका परिवार अंततः खुश और संतुष्ट महसूस करता है कि अब उन्हें उनके बेटे को और अधिक नहीं झेलना पड़ेगा।

बहुत ही मार्मिक कहानी है। यह उपन्यास वास्तविकता से रूबरू करवाता है। अगर आपका शरीर स्वस्थ है तो पूरी दुनिया आपकी है वरना आपके सगे भी आपका साथ छोड़ देते हैं।

आभार-सुनंदा जी

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