हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूरे होने पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में होगी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी
सीवान रहवासी शोधार्थी राजेश पाण्डेय अपने शोध पत्र का करेंगे वाचन
उदंत मार्तंड से ए.आई. युग की तकनीक पत्रकारिता पर होगा महासंवाद
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

हिंदी पत्रकारिता के दो वर्ष पूरे होने पर 11-12 अप्रैल 2026 को प्रतिष्ठित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
संगोष्ठी का मुख्य विषय “उंदत मार्तंड से ए.आई. युग तक: दो शताब्दियों का महासंवाद” है। भारत सरकार में शिक्षा मंत्रालय के द्वारा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली उक्त संगोष्ठी की प्रायोजक है। संगोष्ठी में मुख्य विषय के अतिरिक्त चालीस विषयों को रखा गया है, जिस पर आचार्य, सहायक आचार्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी अपने शोध आलेख को प्रस्तुत करेंगे।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार में हिंदी विभाग के शोधार्थी एवं सीवान निवासी राजेश पाण्डेय के शोध पत्र का चयन उक्त संगोष्ठी में वाचन के लिए किया गया है। जिस पर विभाग के आचार्य, सहायक आचार्य, शोधार्थी मित्रों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
आयोजकों का कहना है कि हिंदी पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की यात्रा को समझना केवल ऐतिहासिक अध्ययन नहीं वरन आज की ए.आई. एवं डिजिटल वातावरण में पत्रकारिता की भविष्य को दिशा देने का प्रयास भी है। इन दो सौ वर्षों में हिंदी पत्रकारिता ने औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध आंदोलन प्रसारित करने से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक दिशा देने, लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने, सामाजिक सुधारो को गति प्रदान करने तथा जनमानस के अभिव्यक्ति को स्थान देने में महती भूमिका का निर्वहन किया है।

मीडिया का स्वरूप निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उक्त संक्रमण काल में हिंदी पत्रकारिता की परंपरा, वर्तमान चुनौती और भविष्य की संभावना पर विचार-विमर्श आवश्यक प्रतीत होता है। सेमिनार से हिंदी पत्रकारिता की भविष्य की रूपरेखा, नई पीढ़ी के पत्रकारों एवं शोधार्थियों को प्रेरित करने और तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप उत्तरदायी एवं मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता की दिशा निर्धारित करने में सहायता होगी।

संगोष्ठी में उद्घाटन एवं समापन सत्र के अतिरिक्त कुल छह सत्र होंगे। जिसमें विद्वान आचार्यों के द्वारा उक्त विषय पर सारगर्भित उद्बोधन प्रस्तुत होगा। इसके अतिरिक्त समानांतर सत्रों में शोध पत्रों का वाचन भी सुनिश्चित किया गया है।
