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सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। पवन खेड़ा पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर पुलिस केस दर्ज है।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अफसोस जताते हुए कहा, “क्या यह अदालत मुझे मंगलवार तक सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती… क्या मैं कोई आतंकवादी हूं?”

खेड़ा के वकील ने क्या कहा?

चूंकि अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया तो खेड़ा की ओर से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा, “आज शुक्रवार है, मैं सोमवार को याचिका दायर कर रहा हूं। क्या मैं कोई संगीन अपराधी हूं कि मुझे यह राहत भी न दी जाए?”

सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को दिया ये निर्देश

इसके बजाय, अदालत ने खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने का निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने हाई कोर्ट से यह भी कहा कि वह इस सुनवाई के दौरान की गई उसकी अपनी टिप्पणियों से प्रभावित न हो।

इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि असम की अदालत खेड़ा के आवेदन पर स्वतंत्र रूप से, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और उसके अपने गुण-दोषों के आधार पर निर्णय लेगी और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने पिछले आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगी।

फर्जी आधार को लेकर क्या कहा?

उन्होंने आगे यह तर्क दिया कि तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 अप्रैल को लगाई गई रोक खेड़ा द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों को लेकर हुई एक गलतफहमी के आधार पर हासिल की गई थी।

सॉलिसिटर जनरल के इस तर्क का जिक्र करते हुए कि हाई कोर्ट से राहत एक जाली आधार दस्तावेज का इस्तेमाल करके हासिल की गई थी, सिंघवी ने कहा कि दस्तावेज जमा करने की जल्दबाजी के कारण कुछ गड़बड़ी हो गई थी और बाद में अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ हाई कोर्ट के सामने इस गलती को स्पष्ट कर दिया गया था।

खेड़ा ने क्या मांग की थी?

खेड़ा ने अपनी ट्रांजिट अग्रिम जमानत की अवधि मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि असम की अदालतें इस समय बंद हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और निर्देश दिया कि अग्रिम जमानत के लिए कोई भी याचिका बिना किसी देरी के असम की संबंधित अदालत में दायर की जाए।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांसिट अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली असम सरकार की याचिका पर पवन खेड़ा व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के आदेश पर रोक का मतलब है कि पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत के रूप में गिरफ्तारी से मिला संरक्षण समाप्त हो गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पवन खेड़ा क्षेत्राधिकार वाली असम की अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं और अगर वह अर्जी दाखिल करते हैं तो शीर्ष अदालत के ट्रांसिट जमानत पर रोक के आदेश का उस पर कोई प्रतिकूल असर नहीं होगा।

ये आदेश न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी और अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांसिट अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के बाद दिये।

कोर्ट ने खेड़ा को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने याचिका पर पवन खेड़ा व अन्य को नोटिस जारी कर 13 मई तक जवाब मांगा है। 13 मई को फिर सुनवाई होगी। ये मामला पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी पर आरोप लगाए जाने से संबंधित है। खेड़ा ने सरमा की पत्नी पर कई देशों के पासपोर्ट रखने और विदेश में संपत्ति होने के आरोप लगाए थे। जिस पर मुख्यमंत्री की पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज कराई है।

हाई कोर्ट ने दी थी एक सप्ताह की अग्रिम जमानत

पिछले सप्ताह तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांसिट अग्रिम जमानत दे दी थी। बुधवार को असम सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि तेलंगाना हाई कोर्ट को मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अपराध गुवाहाटी असम में हुआ है, एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज हुई है तो फिर तेलंगाना हाई कोर्ट मामले को कैसे सुन सकता है।

इस पर पीठ ने कहा कि उनका कहना है कि उनकी पत्नी हैदराबाद में रह रही हैं। इस पर मेहता ने कहा कि खेड़ा ने तेलंगाना में याचिका दाखिल करने के लिए दस्तावेज (आधार कार्ड) का उपयोग किया है। उस आधार कार्ड के पहले पेज पर पवन खेड़ा का नाम है, जबकि आधार कार्ड के पिछले हिस्से पर उनकी पत्नी का पता दर्ज है और दोनों के आधार नंबर भिन्न हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया गया है मेहता ने कहा कि इसे फोरम चुनने (पसंद की अदालत चुनने) की श्रेणी में रखा जाएगा। यह कानून का दुरुपयोग है।

मेहता ने कहा कि उन्होंने यह नहीं बताया है कि वह असम क्यों नहीं जा सकते। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद मेहता की दलीलों को आदेश में दर्ज किया और याचिका पर नोटिस जारी करते हुए 13 मई तक जवाब मांगा है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने खेड़ा को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने याचिका पर पवन खेड़ा व अन्य को नोटिस जारी कर 13 मई तक जवाब मांगा है। 13 मई को फिर सुनवाई होगी। ये मामला पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी पर आरोप लगाए जाने से संबंधित है। खेड़ा ने सरमा की पत्नी पर कई देशों के पासपोर्ट रखने और विदेश में संपत्ति होने के आरोप लगाए थे। जिस पर मुख्यमंत्री की पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज कराई है।

हाई कोर्ट ने दी थी एक सप्ताह की अग्रिम जमानत

पिछले सप्ताह तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांसिट अग्रिम जमानत दे दी थी। बुधवार को असम सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि तेलंगाना हाई कोर्ट को मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अपराध गुवाहाटी असम में हुआ है, एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज हुई है तो फिर तेलंगाना हाई कोर्ट मामले को कैसे सुन सकता है।

इस पर पीठ ने कहा कि उनका कहना है कि उनकी पत्नी हैदराबाद में रह रही हैं। इस पर मेहता ने कहा कि खेड़ा ने तेलंगाना में याचिका दाखिल करने के लिए दस्तावेज (आधार कार्ड) का उपयोग किया है। उस आधार कार्ड के पहले पेज पर पवन खेड़ा का नाम है, जबकि आधार कार्ड के पिछले हिस्से पर उनकी पत्नी का पता दर्ज है और दोनों के आधार नंबर भिन्न हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया गया है मेहता ने कहा कि इसे फोरम चुनने (पसंद की अदालत चुनने) की श्रेणी में रखा जाएगा। यह कानून का दुरुपयोग है।

मेहता ने कहा कि उन्होंने यह नहीं बताया है कि वह असम क्यों नहीं जा सकते। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद मेहता की दलीलों को आदेश में दर्ज किया और याचिका पर नोटिस जारी करते हुए 13 मई तक जवाब मांगा है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

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