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लेंसकार्ट ने ड्रेस कोड विवाद पर नई स्टाइल गाइड जारी कर माफी मांगी है

लेंसकार्ट ने ड्रेस कोड विवाद पर नई स्टाइल गाइड जारी कर माफी मांगी है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क 

 ड्रेस कोड को लेकर विवाद में घिरी कंपनी लेंसकार्ट ने अब नई स्टाइल गाइड जारी कर माफी मांगी है। कंपनी ने साफ किया है कि कर्मचारी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ काम कर सकते हैं। हालांकि, इस कदम के बावजूद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

लेंसकार्ट ने बयान जारी कर कहा कि उसने ग्राहकों और लोगों की चिंताओं को ध्यान से सुना है। कंपनी ने माना कि अगर पहले की किसी जानकारी से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे खेद है। साथ ही यह भी कहा गया कि कंपनी भारत में बनी है और यहां के लोगों के लिए काम करती है, इसलिए कर्मचारियों को अपनी पहचान छोड़ने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

नई गाइडलाइन में साफ तौर पर कहा गया है कि कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहन सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि आगे की नीतियां और ट्रेनिंग इसी सोच को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी।

क्या है नई ड्रेस कोड गाइडलाइन?

नई गाइडलाइन के मुताबिक कर्मचारियों को कंपनी की टी-शर्ट, साधारण गहरे नीले रंग की जींस और बंद जूते पहनना होगा। इसके साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक चीजें जैसे कड़ा, चूड़ियां, मंगलसूत्र, कलावा पहनने की अनुमति दी गई है। छोटे झुमके, नथ, अंगूठी और चेन भी पहन सकते हैं।

गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि बिंदी, तिलक और सिंदूर जैसे धार्मिक चिन्ह पूरी तरह से मान्य हैं। वहीं पगड़ी और हिजाब जैसे सिर ढकने वाले कपड़े भी पहनने की अनुमति है, बशर्ते वे साफ-सुथरे हों और काम में बाधा न डालें।

कंपनी ने यह भी कहा कि वह प्रोफेशनल माहौल, साफ-सफाई और सभी कर्मचारियों के साथ बराबरी का व्यवहार बनाए रखेगी। कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया गया है कि वे बिना डर के अपनी शिकायत एचआर से कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

नई गाइडलाइन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने कंपनी पर भरोसा खोने की बात कही। कुछ लोगों ने कंपनी के खिलाफ विरोध जताने की भी अपील की।

एक यूजर ने लिखा कि कंपनी ने नीति बदल दी, लेकिन यह बदलाव पकड़े जाने के बाद किया गया, इसलिए भरोसा टूट गया है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर कंपनी भारत की है तो पहले ऐसी पाबंदियां क्यों थीं। एक अन्य यूजर ने कंपनी के सीईओ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले इस नीति को पुराना बताया गया, लेकिन अब माफी मांगी जा रही है, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हुआ।

कैसे बढ़ा विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कंपनी के कथित ड्रेस कोड को लेकर सवाल उठे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कंपनी कुछ धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देती है, जबकि कुछ पर रोक लगाती है। इसके बाद कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। लेकिन इसी बीच कंपनी के पोंगल से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर भी आलोचना शुरू हो गई।

कर्मचारियों ने सुनाई अपनी आपबीती
पुणे के पूर्व स्टोर मैनेजर हर्ष हटेकर ने बताया कि 2024 में स्टाफ के हाथ में कलावा पहनने पर ऑडिट में अंक काटे गए थे. वहीं एक अन्य पूर्व मैनेजर आकाश फालके ने दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे को HR के सामने उठाया, लेकिन कोई लिखित समाधान नहीं मिला. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उनके वेतन और इंसेंटिव में कटौती हुई और बाद में नौकरी भी चली गई.
कंपनी ने मानी गलती, जारी किया नया गाइड
विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट ने शनिवार को अपना नया स्टाइल गाइड सार्वजनिक किया. कंपनी ने साफ कहा कि बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का स्वागत है. कंपनी ने माना कि पहले की कुछ कम्युनिकेशन से कर्मचारियों को ठेस पहुंची और इसके लिए माफी भी मांगी.
सीईओ पीयूष बंसल का बयान
कंपनी के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जो दस्तावेज वायरल हुआ था, वह एक पुराना ट्रेनिंग फाइल था, न कि आधिकारिक नीति. उन्होंने स्वीकार किया कि उसमें बिंदी और तिलक से जुड़ी गलत लाइन थी, जिसे पहले ही हटा दिया गया था, लेकिन समय पर ध्यान न देने की जिम्मेदारी उन्होंने खुद ली.
अब समानता और पारदर्शिता पर जोर
लेंसकार्ट ने कहा है कि अब आगे की सभी नीतियां और ट्रेनिंग मटेरियल पूरी तरह से समावेशी होंगे. कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा और किसी भी धर्म या परंपरा के आधार पर भेदभाव नहीं होगा. हालांकि, कंपनी ने कर्मचारियों द्वारा लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों पर अभी तक अलग से जवाब नहीं दिया है.
कंपनियों के लिए बड़ा संदेश
इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि आज के समय में कंपनियों को अपने नियमों में पारदर्शिता और समानता बनाए रखना जरूरी है. कर्मचारियों की पहचान और उनकी आस्था का सम्मान करना किसी भी संगठन के लिए महत्वपूर्ण है. लेंसकार्ट का यह कदम अब अन्य कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है.

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