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सीवान के लहेजी में मिली सदगुरु कबीर साहेब के मूल बीजक धनौती पाठ की हस्तलिखित पांडुलिपियां

सीवान के लहेजी में मिली सदगुरु कबीर साहेब के मूल बीजक धनौती पाठ की हस्तलिखित पांडुलिपियां
श्रीनारद मीडिया, सीवान (बिहार):
 सीवान के जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने प्राचीन पांडुलिपियों का किया अवलोकन और आम जनता से हस्तलिखित 75 साल से पुरानी पांडुलिपियों को साझा करने का किया निवेदन*
पांडुलिपियों के राष्ट्र व्यापी सर्वेक्षण के लिए संचालित ज्ञान भारतम मिशन के तहत सीवान को एक बड़ी उपलब्धि शुक्रवार को हासिल हुई। जिले के हसनपुरा के लहेजी गांव में स्थित भगताही कबीर मठ पर सदगुरु कबीर साहेब के *मूल बीजक* धनौती पाठ की हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली। इसका अवलोकन करने जिलाधिकारी श्री विवेक रंजन मैत्रेय लहेजी पहुंचे।
आचार्य महंत गुरु प्रसाद गोस्वामी और उत्तराधिकारी महंत आचार्य आमोद शरण गोस्वामी ने बताया कि सदगुरु कबीर साहब के बीजक का संकलन आचार्य भगवान गोस्वामी साहेब जी ने किया था। उन्होंने बताया कि यह पांडुलिपि 400 वर्ष से पुरानी भी हो सकती हैं। लहेजी में कबीर मठ की 100 से 150 वर्ष की गतिविधियों को बताने वाली कुछ अन्य हस्तलिखित पांडुलिपियां भी मिली है।
जिला पदाधिकारी ने आम जनता से पुनः आग्रह किया है कि अपने घर में 75 वर्ष से पुरानी पांडुलिपियों को जरूर ढूंढे।
लहेजी में मूल बीजक के हस्तलिखित पांडुलिपि के मिलने को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताते हुए कबीर मठ और रसमंजरी फाउंडेशन के साथ चंदन श्रीवास्तव और गणेश दत्त पाठक के प्रयासों की सराहना भी किया।
हसनपुरा प्रखंड के लहेजी गांव में सदगुरू कबीर साहेब के बीजक की हस्तलिखित मूल पांडुलिपि के मिलने की सूचना पर जिला पदाधिकारी सिवान तत्काल वहां पहुंचे और प्राप्त पांडुलिपियों का अवलोकन किया। उन्होंने लहेजी में कबीर मठ के गतिविधियों को स्पष्टता से बयां कर रही 100 से 150 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। उत्तराधिकारी महंत आचार्य आमोद शरण गोस्वामी ने लहेज़ी कबीर मठ की प्राचीनता से जिला पदाधिकारी को अवगत कराया।
मौके पर जिला पदाधिकारी सिवान श्री विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ज्ञान भारतम मिशन को चलाया जा रहा हैं। इसमें 75 वर्ष से अधिक की हस्तलिखित पांडुलिपियों को जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक महत्व की हो , को साझा करने के लिए आम जनता का सहयोग मांगा जा रहा है। उन्होंने आम जनता से आग्रह किया कि अपने घरों में 75 वर्ष से प्राचीन की हस्तलिखित पांडुलिपियों को अवश्य ढूंढे और उसे ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड करें या जिला प्रशासन को सूचित करें।
*जिला पदाधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि पांडुलिपियों पर स्वामित्व संबंधित संरक्षकों का ही रहेगा। हम लोग केवल उसके डिजिटली संरक्षित करने में सहयोग प्रदान करने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐतिहासिक तथ्यों के शोध आदि में मदद मिल सके।*
मौके पर जिला कला संस्कृति पदाधिकारी शालू कुमारी, वरीय उपसमाहर्ता जूली कुमारी, सी ओ और बीडीओ हसनपुरा आदि मौजूद रहें।

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