विश्व रेडक्रॉस दिवस: मानवता की सेवा का अटूट संकल्प
श्रीनारद मीडिया, स्टेट डेस्क:

पूरे विश्व में ‘विश्व रेडक्रॉस दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। यह दिवस न केवल रेडक्रॉस के संस्थापक सर हेनरी ड्यूनेंट की जयंती है, बल्कि यह उन करोड़ों निस्वार्थ सेवा कर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है, जिन्होंने अपना जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया।
भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी (IRCS) देश की सबसे बड़ी मानवीय संस्था है, जो प्राकृतिक आपदाओं, अकाल, महामारियों और युद्ध जैसी विभीषिकाओं के समय राहत सामग्री, रक्तदान शिविरों, प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से लाखों जरूरतमंदों की मदद करती है। कोरोना काल से लेकर बाढ़, चक्रवात और भूकंप तक – रेडक्रॉस के स्वयंसेवक हमेशा सबसे आगे रहे हैं, बिना किसी जाति, धर्म या क्षेत्र के भेदभाव के।
इस दिवस का मूल संदेश है – ‘निःस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा’। रेडक्रॉस का लाल क्रॉस प्रतीक आशा की वह किरण है जो संकट की घड़ी में राहत पहुँचाती है। जब कोई अपना मुँह मोड़ लेता है, तब रेडक्रॉस कार्यकर्ता अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने का काम करते हैं। उनका योगदान अक्सर मीडिया की सुर्खियों से दूर रहता है, लेकिन भूखे, बेघर और पीड़ित मानव के लिए वे ईश्वर से कम नहीं होते।
आज के दिन हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि थोड़ा समय, थोड़ा रक्त या थोड़ा दान – जैसी भी सहायता हम कर सकते हैं, अवश्य करें। रेडक्रॉस में शामिल होकर या उनके राहत कार्यों में योगदान देकर हम ‘परस्पर सहायता’ और ‘मानवता के प्रति करुणा’ के उस मार्ग पर चल सकते हैं, जिसकी स्थापना 160 वर्ष पहले हुई थी।
भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के उन सभी सदस्यों, चिकित्सकों, नर्सों, ड्राइवरों, रक्तदाताओं और स्वयंसेवियों को कोटि-कोटि नमन – जो दिन-रात, त्योहार-विपदा में अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। आप ही ‘मानवता’ की असली मिसाल हैं।
शुभकामनाएँ विश्व रेडक्रॉस दिवस पर!
आइए, हम सब मिलकर रेडक्रॉस के सिद्धांतों – मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिकता, एकता और सार्वभौमिकता – को अपने जीवन में उतारें। क्योंकि जब हम किसी के काम आते हैं, तो हमारा जीवन सार्थक हो जाता है। यही रेडक्रॉ्स की पहचान है, यही भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की प्रतिबद्धता है।
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