सांस्कृतिक व बौद्धिक रूप से समृद्ध करेगी सीबीएसई की नई नीति : डॉ. शरद चौधरी
श्रीनारद मीडिया, सीवान (बिहार):

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नई तीन-भाषा नीति को शिक्षा जगत विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहा है। इस नीति का उद्देश्य बहुभाषिक क्षमता का विकास करना, मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान बढ़ाना तथा विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करना है।
उक्त बातें विद्या भारती बिहार के कार्यकारिणी सदस्य एवं महावीरी सरस्वती विद्या मंदिर, विजयहाता, सिवान के अध्यक्ष डॉ. शरद चौधरी ने कही।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को भाषाई, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रूप से समृद्ध करेगी। इसके अंतर्गत तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा के लिए कक्षा 10 में अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव नहीं रहेगा।
डॉ. शरद चौधरी ने कहा कि किसी विशेष भाषा को थोपा नहीं जा रहा है। सीबीएसई पहले से ही 45 से अधिक भाषाओं का विकल्प उपलब्ध कराता है। उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को विभिन्न भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि “अधिक भाषाएं, अधिक समझ और बेहतर भविष्य” का लक्ष्य साकार हो सके।
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