सीएचसी एकमा में अग्नि सुरक्षा का लाइव प्रदर्शन, कर्मचारियों ने सीखे बचाव के तरीके
– मॉक ड्रिल के माध्यम से आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित निकासी का दिया गया प्रशिक्षण
– आग लगने पर क्या करें, क्या नहीं; सीएचसी एकमा में मॉक ड्रिल से मिला प्रशिक्षण
– चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और आम लोगों को अग्निशमन उपकरणों के उपयोग की दी गई जानकारी
– मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद बढ़ी सतर्कता, अग्निशमन टीम ने कराया लाइव प्रदर्शन
श्रीनारद मीडिया, के के सिंह सेंगर, एकमा, सारण (बिहार):

अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एकमा परिसर में अग्नि सुरक्षा एवं बचाव को लेकर विशेष प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सूत्रों के अनुसार हाल ही में मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में हुई आग लगने की घटना के बाद बिहार सरकार और संबंधित विभागों द्वारा जारी निर्देशों के तहत यह पहल की गई।
कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार, जिला अग्निशमन पदाधिकारी अनुरुद्ध प्रसाद तथा सदर अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी सूरज कुमार के निर्देशानुसार किया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने सीएचसी परिसर में कृत्रिम रूप से आग लगने की स्थिति तैयार कर उसके नियंत्रण और बचाव की पूरी प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन किया। अग्निशमन कर्मी शंकर चौधरी, ललित कुमार महतो, बबलू कुमार, पूजा कुमारी व शशिभूषण कुमार सिंह ने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय, सुरक्षाकर्मियों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विभिन्न प्रकार के अग्निशामक यंत्रों के उपयोग की व्यावहारिक जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय संयमित रहते हुए तत्काल बचाव कार्य शुरू करने के तरीके बताए गए।
कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. साजन कुमार, चिकित्सक डॉ. सुशील कुमार प्रसाद, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक वाहिद अख्तर, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, शिक्षक व संभ्रांत नागरिकों कमल कुमार सिंह, मोतीचंद प्रसाद, संजीत अकेला, हाउसकीपिंग सुपरवाइजर परवेज अख्तर, लैब तकनीशियन सुनील कुमार गुप्ता, स्टोर प्रभारी ओमप्रकाश प्रसाद, लेखापाल ब्रजेश कुमार सिंह, सीएमओ आदर्श तिवारी सहित एएनएम, जीएनएम, स्वास्थ्य कर्मी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सभी प्रतिभागियों ने अग्निशमन उपकरणों के संचालन का अभ्यास किया और आपदा प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान शिक्षक कमल कुमार सिंह ने आग लगने के प्रमुख कारणों, विभिन्न प्रकार की आग की प्रकृति तथा उनके अनुसार उपयुक्त अग्निशामक यंत्रों के चयन और उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता और समय पर सही कार्रवाई से बड़ी से बड़ी दुर्घटना को भी टाला जा सकता है।
मॉक ड्रिल के दौरान मरीजों के परिजनों और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों को भी अग्नि दुर्घटना की स्थिति में अपनाई जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें आपातकालीन निकास मार्गों का उपयोग, विद्युत उपकरणों के सुरक्षित संचालन तथा अफ़रा-तफ़री से बचने के उपाय बताए गए। साथ ही अस्पताल परिसर में विभिन्न स्थानों पर स्थापित अग्निशमन यंत्रों और सुरक्षा प्रणालियों की जांच कर उनकी कार्यशीलता का भी परीक्षण किया गया।
अग्निशमन विभाग की टीम ने बताया कि अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडरों की मौजूदगी और बिजली के अधिक उपयोग के कारण आग लगने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल कर्मचारियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ आपदा से निपटने की क्षमता को भी मजबूत करती है।
प्रधान अग्निक शंकर चौधरी ने बताया कि किसी भी अग्नि दुर्घटना की स्थिति में आमजन तत्काल डायल-101, डायल-112 अथवा अग्निशमन विभाग के सरकारी मोबाइल नंबर 7485806110 पर सूचना देकर समय रहते सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में सतर्क रहने की अपील की।
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