शिक्षा पाने के लिए हनुमान जी ने किया था शादी – मालती
श्रीनारद मीडिया, जीरादेई, सीवान (बिहार):

सीवान जिला के जीरादेई प्रखण्ड क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक गांव अनंतनाथ धाम अकोल्ही में विजयीपुर नगर के पास चल रहे श्री हनुमंत प्राण प्रतिष्ठात्मक महायज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को महाबली भगवान महावीर की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रों द्वारा की गई । प्राचार्य डा कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा मनुष्य की अनमोल निधि है जो मनुष्य के जीवन में ज्ञान विज्ञान व अध्यात्म के क्षेत्र में निखार लाती है ।उन्होंने बताया कि इसी शिक्षा को पाने के लिए ब्रह्मचारी हनुमान जी को शादी करनी पड़ी पर शादी के बाद भी वे ब्रह्मचर्य ही रहे क्योंकि जीवन में कभी भी वे सहवास नहीं किये । कथावाचिका मालती उपाध्याय ने कहा कि
सूर्यदेव की पुत्री से हुआ था हनुमान जी का विवाह।
उन्होंने बताया कि पाराशर संहिता में है वर्णन कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के परम भक्त
हनुमान जी को ब्रह्मचारी माना जाता है लेकिन पुराणों में उनकी पत्नी सुवर्चला बताई गई हैं। तेलंगाना में उनके नाम का एक मंदिर भी बना है तथा यहां पूरी श्रद्धा के साथ उनका पूजन किया जाता है। बता दें कि तेलंगाना के खम्मम जिले में हनुमान जी का ये मंदिर देश का अकेला ऐसा मंदिर है जहां उनकी मूर्ति पत्नी के साथ स्थापित है। कथावाचिका ने बताया कि जहां तक इनके विवाहित होने की बात है तो पाराशर संहिता में हनुमान जी और सुवर्चला के विवाह की कथा है।
उन्होंने बताया कि तेलंगाना के इस मंदिर की मान्यता का आधार पाराशर संहिता को माना गया है। पाराशर संहिता में ही हनुमान जी के विवाहित होने का प्रमाण मिलता है। उनका विवाह सूर्यदेव की पुत्री सुवर्चला से हुआ है। कथावाचिका ने बताया कि संहिता के अनुसार, हनुमानजी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। सूर्य देव के पास 9 दिव्य विद्याएं थीं जिनका ज्ञान बजरंग बली प्राप्त करना चाहते थे। सूर्य देव ने इन 9 में से 5 विद्याओं का ज्ञान तो हनुमानजी को दे दिया, लेकिन शेष 4 विद्याओं के लिए सूर्य के समक्ष एक संकट खड़ा हो गया।
दरअसल इन 4 दिव्य विद्याओं का ज्ञान सिर्फ उन्हीं शिष्यों को दिया जा सकता था जो विवाहित हों। इस समस्या को दूर करने के लिए सूर्य देव ने हनुमानजी से विवाह करने की बात कही।
कथावाचिका ने बताया कि हनुमान जी के परम भक्ति ,समर्पण व जिज्ञसा को देखते हुए सूर्यदेव ने अपनी तपस्वी व विदूषी पुत्री सुवर्चला को राजी किया तथा हनुमान जी से शादी कराया शादी केवल विद्या अध्ययन के लिए ही किया गया था । शादी के तुरंत बाद पुनः उनकी पत्नी तपस्या में लीन हो गयी ।उन्होंने बताया कि हनुमान जी ने जीवन में कभी भी सहवास नहीं किये है इसलिए आजीवन ब्रह्मचारी है ।
मालती ने बताया कि सूर्यदेव ने इस शादी पर कहा है कि “यह शादी ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ही हुआ है ।और इससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य भी प्रभावित नहीं हुआ ।उन्होंने बताया कि इस प्रकार की घटना आदिशंकराचार्य के साथ भी घटित हुई थी जब वे मडंलमिश्र के पत्नी से शास्त्रार्थ में परास्त हुए थे उन्होंने ने भी अपनी अध्यात्म शक्ति से शादी के रहस्य को जाना तथा फिर मडंल मिश्र के पत्नी के प्रश्न का जबाब दिया था ।
इस मौके पर परम् गुरु रामनारायण दास जी महाराज, लोकपाल प्रशांत कुमार प्राचार्य डा कृष्ण कुमार सिंह , मुखिया हरेंद्र सिंह , सनातन संदेशवाहक अर्जुन सिंह कुशवाहा , सरपंच डा बालेश्वर राम ,आरती सिंह ,कन्हैया चौहान,चंदन मांझी ,सत्येंद्र यादव ,विनोद शर्मा ,रविन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे ।
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