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सोनू-मोनू को अरेस्ट कर घिर गई पुलिस, खुद जांच के लिए पहुंचे DIG

सोनू-मोनू को अरेस्ट कर घिर गई पुलिस, खुद जांच के लिए पहुंचे DIG

बदमाश की कमर में जबरन पिस्टल खोसने का आरोप

 

बेगूसरायः भरत भूषण एनकाउंटर के बाद एक बार फिर पुलिस सवालों के घर में है. अब बेगूसराय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. जिले के बलिया थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव से टॉप-10 अपराधी सोनू-मोनू की गिरफ्तारी के बाद सामने आए एक वीडियो ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया. वीडियो में पुलिस पर गिरफ्तार आरोपी की कमर में जबरन पिस्टल खोंसने का आरोप लगाया गया. मामला तूल पकड़ने के बाद बेगूसराय-खगड़िया रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा खुद बरियारपुर पहुंचे.

 

 

हालांकि, डीआईजी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन गांव में लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने पूरे मामले की पड़ताल की. ग्रामीणों ने डीआईजी को बताया कि जब पुलिस सोनू-मोनू को गिरफ्तार कर रही थी, तब किसी ने विरोध नहीं किया. लोगों का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिसकर्मियों ने आरोपी की कमर में जबरन पिस्टल खोंस दी, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया. इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया.

 

पुलिस लगे आरोप ग्रामीणों ने डीआईजी से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. उनका कहना है कि अगर पुलिस ने गलत तरीके से सबूत दिखाने की कोशिश की है तो यह बेहद गंभीर मामला है. गौरतलब है कि गिरफ्तारी के बाद वायरल हुए वीडियो को लेकर पहले बलिया डीएसपी सुबोध कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को भ्रामक बताया था. हालांकि मामला लगातार चर्चा में रहने और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद अब डीआईजी स्वयं जांच के लिए गांव पहुंचे हैं.

 

 

इससे यह मामला और गंभीर हो गया.कैसे गिरफ्तार हुए मोस्ट वांटेड? डीएसपी सुबोध कुमार ने बताया कि 20 जून को बलिया थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव में बच्चों के विवाद के बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया था. इसी दौरान कुख्यात अपराधी सोनू और मोनू सिंह पर फायरिंग करने का आरोप लगा. पुलिस तभी से दोनों की तलाश में जुटी थी. गुप्त सूचना मिली कि दोनों किसी बड़ी वारदात की तैयारी में हैं, जिसके बाद विशेष टीम ने बरियारपुर में घेराबंदी कर छापेमारी की. भागने की कोशिश के दौरान दोनों को दबोच लिया गया. पुलिस का दावा है कि सोनू ने पिस्तौल निकालकर पुलिस पर तान दी थी, लेकिन जवानों ने जान जोखिम में डालकर हथियार छीन लिया.

 

 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर पुलिस ने कहा कि आरोपी को फंसाने के लिए पिस्तौल नहीं दी गई, बल्कि छीना गया हथियार ही उसकी कमर में रखा जा रहा था.सोनू-मोनू पर कितने केस? पुलिस के मुताबिक, दोनों भाई इलाके के कुख्यात अपराधी हैं और लंबा आपराधिक इतिहास रखते हैं. सोनू सिंह के खिलाफ बलिया थाने में 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि उसके भाई मोनू सिंह पर 9 केस दर्ज हैं. पूछताछ में पुलिस को इनके एक संगठित अपराधी गिरोह से जुड़े होने की भी जानकारी मिली है. पुलिस का कहना है कि दोनों के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई जारी है.

 

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