भारत से मेडागास्कर तक Gen Z विरोध प्रदर्शनों की कमान संभाल रहे हैं, क्यों?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर नई पीढ़ी पहले से कई अधिक सजग और मुखर हो गई है, इसका उदाहरण भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में दिखाई दे रहे है।
भारत में पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर छात्रों का आंदोलन हो या फिर बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या और सर्बिया में सरकारों को खिलाफ युवाओं का प्रदर्शन अब सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।
स्टैटिस्टा के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 से 2026 के बीच दुनिया में कम से कम 10 देशों में बड़े पैमाने पर युवा-नेतृत्व वाले प्रदर्शन देखने को मिले। Gen Z के इन आंदोलनों के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी मूल मांगे लगभग एक जैसी हैं, जिनमें बेहतर शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार पर रोक, लोकतांत्रिक और जवाबदेह शासन।
इन देशों में Gen-Z ने संभाली विरोध की कमान
- भारत
- बांग्लादेश
- नेपाल
- इंडोनेशिया
- फिलीपींस
- तिमोर-लेस्ते
- सर्बिया
- केन्या
- मेडागास्कर
- मोरक्को
- पेरू
इन देशों में प्रदर्शन भले ही अलग-अलग मुद्दों और मांगों पर हुआ हो, लेकिन इन प्रदर्शनों में शामिल लोगों में छात्र, युवा और पेशेवरों बड़ी संख्या में सड़कों पर देखने को मिली।
सोशल मीडिया से आंदोलन खड़ा कर रहे Gen Z
दुनियाभर में Gen Z आज अपनी मांगों को लेकर सड़क पर संघर्ष के लिए आगे रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई है। इसलिए ये अपनी समस्याओं को केवल निजी चर्चा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें सार्वजनिक बहस का विषय बना देती है।
भारत में Gen Z ने विरोध का एक नया मॉडल विकसित किया है। छात्र केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने मीम्स, सोशल मीडिया ट्रेंड, हैशटैग कैंपेन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए अपनी आवाज बुलंद की।
बीते कुछ सालों में NEET, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का असंतोष लगातार सामने आया। सोशल मीडिया ने इन आंदोलनों को देशभर में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
क्यों सड़कों पर आ रहे युवा?
- पेपर लीक और अनियमितताएं
- बेरोजगारी
- भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही में कमी
- सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता की मांग
- लोकतांत्रिक अधिकार
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा
- महंगाई और आर्थिक चुनौतियां
दुनिया भर में दिख रहा ट्रेंड
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये प्रदर्शन किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर युवाओं की बदलती सोच का संकेत है।
एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका, हर क्षेत्र में युवा सरकारों से अधिक पारदर्शिता, बेहतर अवसर और जवाबदेह नीतियों की मांग कर रहे हैं। पहली बार वोट देने वाली पीढ़ी अब केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतियों और शासन पर भी प्रभाव डाल रही हैं।
Gen Z के ये आंदेलन केवल विरोध प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि यह उस पीढ़ी की आवाज हैं जो अपने भविष्य को लेकर समझौता नहीं करना चाहती। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और जागरूक नागरिक से साथ यह पीढ़ी सरकारों और संस्थाओं से जवाबदेही की मांग कर रही है।
