नीट पेपर लीक मामले में NTA ने बड़ा ऐक्शन लिया है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

नीट पेपर लीक और बढ़ते छात्र आंदोलन के बीच सरकार लगातार ऐक्शन में है। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(NTA) ने नीट पेपर लीक से जुड़े 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। इतना ही नहीं एजेंसी ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ आई रिपोर्ट्स के आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की तरफ से यह फैसला नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के बीच उठ रहे उबाल को लेकर हुआ है। इससे पहले ही गुरुवार को केंद्र सरकार ने बड़ा फेरबदल करते हुए 17 आईएएस अधिकारियों का फेरबदल किया था। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के मौजूदा सचिव को उनके पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह पर 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया गया है।
पेपर लीक के खिलाफ ऐक्शन में सरकार
जंतर-मंतर पर जारी प्रोटेस्ट के बीच सरकार ने पेपर माफिया पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करते हुए ऐक्शन लेना शुरू कर दिया है। कल देर रात पीएम मोदी की तरफ से जारी किए गए वीडियो के बाद आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक से जुड़े बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बिल में पेपर लीक के आरोपियों के ऊपर अधिकतम 10 करोड़ रुपए का जुर्माना शामिल है। इसके अलावा दोषी पाए जाने वाले को कम से कम पांच और ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक की सजा देने का प्रावधान है। इन दोनों दी स्थितियों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बता दें, वर्तमान में भारतीय कानून के हिसाब से पेपर लीक के दोषी को केवल तीन से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या संगठित पेपर लीक नेटवर्क में पकड़ा जाता है, तो उसको दस साल की जेल और एक करोड़ का जुर्माना लग सकता है। हालांकि, इसके बाद भी पेपर लीक की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। इसलिए केंद्र सरकार इनको और भी ज्यादा मजबूत कर रही है।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का यह मुद्दा पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सरकार की तरफ से लगातार इस मामले पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया जाता रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा। शुरुआत में इसको लेकर केवल कुछ लोग मैदान में आए, लेकिन कुछ ही दिनों में यह भीड़ हजारों की हो गई। वर्तमान में सरकार नीट पेपर लीक को लेकर ऐक्शन ले रही है। लेकिन प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया है। इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। यह NTA में बड़े बदलावों का हिस्सा है, जो पेपर लीक के मामलों को लेकर विवादों में रही है। इससे पहले केंद्र सरकार ने पिछली रात पहला बड़ा कदम उठाते हुए उच्च शिक्षा सचिव के पद पर तैनात वरिष्ठ IAS अधिकारी विनीत जोशी को हटा दिया था।
हरफनमौला और सरकार के करीबी माने जाने वाले जोशी ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई अहम पदों पर काम किया है। इनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पहले महानिदेशक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं।
बिल लाने जा रही मोदी सरकार
एनटीए में जोशी के कार्यकाल के दौरान स्नातक में दाखिले के लिए संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) शुरू की गयी। हालांकि उन्हें इस अहम परीक्षा में आई गड़बड़ियों को लेकर सरकार की आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अहम कदम उठाते हुए प्रश्नपत्र लीक के लिए कड़ी सजा के प्रावधान वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी है।
इसमें 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। इस घोषणा के कुछ घंटे बाद मंत्रिमंडल ने मसौदे को मंजूरी दी।
दिल्ली में उतारे जा रहे CRPF जवान
बड़ी बात यह है कि अभिजीत दीपके की अगुवाई वाली पार्टी CJP धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम पर मानने को तैयार नहीं है। दूसरी तरफ कांग्रेस भी इसी मांग पर अड़ी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या संसद से सड़क तक यूं ही संग्राम मचता रहेगा। शायद यही सवाल केंद्र सरकार में बैठे लोगों के मन में भी कौंध रहा है।
इसके समाधान के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को मंत्रालय पहले ही पश्चिम बंगाल से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 20 कंपनियों को दिल्ली बुलाया था और अब शुक्रवार को MHA ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात CRPF की 10 कंपनियों को आनन-फानन में दिल्ली एयरलिफ्ट किया है। साफ है कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा नहीं देने के बाद उपजने वाले हालात से निपटने के लिए ये कदम उठा रही है। अगर ऐसा होता है तो न केवल CJP की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है बल्कि CJP की अगुवाई में युवाओं का आंदोलन लंबा खिंच सकता है।
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