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पश्चिम एशिया में 40 दिनों के भीषण संघर्ष के बाद अस्थायी युद्धविराम हुआ

पश्चिम एशिया में 40 दिनों के भीषण संघर्ष के बाद अस्थायी युद्धविराम हुआ

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

 पश्चिम एशिया में 40 दिनों तक चले भयंकर हमलों के बाद अब एक अस्थायी विराम की घोषणा हो गई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच दो हफ्तों का यह ceasefire 7-8 अप्रैल को हुआ, लेकिन युद्ध का पूरा अंत अभी दूर दिख रहा है। दोनों पक्ष अभी भी सतर्क हैं और कुछ जगहों पर छोटे हमले जारी बताए जा रहे हैं।

‘आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट’ (ACLED) के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी से 6 अप्रैल तक अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान पर करीब 3,000 हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने लगभग 1,500 हमले किए। इन झड़पों में पूरे क्षेत्र में भारी जान-माल की हानि हुई।

ईरान में सबसे ज्यादा 2,076 लोग मारे गए

ईरान में सबसे ज्यादा 2,076 लोग मारे गए। लेबनान में 1,497 मौतें दर्ज की गईं। इराक में 109, इजरायल में 26 मौतें हुईं। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, सीरिया, बहरीन, ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों में कुल 31 लोगों की जान गई। अमेरिकी सेना के भी 13 जवान इस संघर्ष में शहीद हुए। हजारों लोग घायल हुए और लाखों को अपने घर छोड़ने पड़े।

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर दुनिया के तेल और गैस के महत्वपूर्ण रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा। यह मार्ग दुनिया की करीब एक पांचवीं तेल आपूर्ति ले जाता है। संघर्ष शुरू होने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई।

प्रति सप्ताह जहाजों की संख्या 39 से घटकर 36

समुद्री डेटा कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, मार्च के मध्य में प्रति सप्ताह जहाजों की संख्या 39 से घटकर 36 रह गई थी। अप्रैल की शुरुआत में यह बढ़कर 72 तक पहुंच गई, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

ज्यादातर जहाज बल्क कैरियर और कच्चे तेल के टैंकर थे। गैस कैरियर, कंटेनर जहाज और प्रोडक्ट टैंकर भी इस अनिश्चितता से प्रभावित रहे। कई जहाजों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़े, जिससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

ईरान और इजरायल के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए सीजफायर पर सहमति बनने का भारत ने भी स्वागत किया है। भारत ने मौजूदा विवाद को समाप्त करने के लिए अपनी तरफ से हरसंभव मदद करने की पेशकश भी की है।

इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर कराने की घोषणा

भारत के विदेश मंत्रालय का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर कराने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आया है। सीजफायर पर अपनी सधी प्रतिक्रिया देने के साथ भारत समूचे खाड़ी क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है।

भारत ने ऑपरेशन सिंधु चला रखा है

मध्य पूर्व में स्थित भारत के सारे दूतावास लगातार वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों के साथ संपर्क में हैं। इस बारे में दिल्ली को भी लगातार सूचना दी जा रही है। इस क्षेत्र में भारत के एक करोड़ से ज्यादा नागरिक काम करते हैं। कुछ देशों से अपने नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए भारत ने ऑपरेशन सिंधु चला रखा है।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले और कतर स्थिति अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई समेत ईरान और इजरायल के बीच जारी विवाद से जुड़े हर घटनाक्रम पर हम नजर रखे हुए हैं।

सीजफायर का भारत ने किया स्वागत

आगे कहा कि हम इस क्षेत्र की सुरक्षा व स्थिरता को देखते हुए काफी चिंतित हैं, लेकिन अमेरिका और कतर की मध्यस्थता की वजह से ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर की आई सूचना का हम स्वागत करते हैं। इस क्षेत्र से जुड़े कई विवादों के समाधान के लिए वार्ता और कूटनीति का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

भारत अपनी भूमिका निभाने को तैयार है। उम्मीद करता है कि सभी संबंधित पक्ष शांति व स्थिरता स्थापित करने के लिए आपस में मिलकर काम करेंगे। इस बयान से साफ है कि भारत ने ईरान की तरफ से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमले को जवाबी कार्रवाई के तौर पर परिभाषित किया है।

भारत के ईरान और इजरायल दोनों के साथ बेहतर संबंध हैं

भारत उन गिने चुने देशों में शामिल है, जिसका ईरान और इजरायल दोनों के साथ बेहतर संबंध है। इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद मजेशकियां ने बहुत ही गिने चुने वैश्विक नेताओं से बात की है। दो दिन पहले उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी से बात की थी।

वार्ता की पेशकश ईरान की तरफ से ही आया था

वार्ता की पेशकश ईरान की तरफ से ही आया था। ईरानी राष्ट्रपति के साथ वार्ता में पीएम मोदी ने मध्य पूर्व की स्थिति पर गहरी चिंता जताई थी और तनाव को घटाने के लिए वार्ता व कूटनीति को अपनाने की पैरवी की थी।

 

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