प्राचीन पांडुलिपियों ने बयां किया सीवान का 200 वर्ष पुराना आर्थिक इतिहास
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पांडुलिपियों के अवलोकन के लिए पहुंचे सीवान डीएम ने आम जनता से आग्रह किया कि अपने घर से 75 साल पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक महत्व की पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम् पोर्टल पर करें साझा
घरों में कुछ पुराने कागज के टुकड़े संदूकों में पड़े रहते हैं। लेकिन हम उनके महत्व को नहीं पहचान पाते। ये कागज के टुकड़े बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उनमें इतिहास के कई मूल्यवान तथ्य समाहित होते हैं। आवश्यकता इस बात की होती है कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक , साहित्यिक तथ्यों से लैस इन पन्नो को पलटा जाए और इतिहास के तथ्यों के साथ उन पन्नो के महत्व को उजागर किया जाए। इससे कुछ ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो हमें पता तो होते हैं लेकिन अपुष्ट तौर पर।
लेकिन यहीं पुराने फटे पन्ने सत्यता और सटीकता के आधार पर इतिहास की गुत्थियों को प्रमाणित भी करते हैं। इसीलिए भारत सरकार ज्ञान भारतम् मिशन चला रहा है ताकि 75 वर्ष से पुराने हस्तलिखित पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन के माध्यम से उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि शोध आदि कार्यों के लिए वे पुराने पन्ने उपलब्ध हो सके। इस संदर्भ में सीवान के जिलाधिकारी श्री विवेक रंजन मैत्रेय के नेतृत्व में भी एक विशेष अभियान चल रहा है।
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपि सर्वेक्षण के क्रम में रविवार को सीवान जिला के संदर्भ में एक विशिष्ट उपलब्धि हासिल हुई। बाबुनिया रोड स्थित डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट फरीद बाबू के यहां से तकरीबन 200 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां सामने आईं, जो सिवान में 1800 से 1950 तक की आर्थिक गतिविधियों को स्पष्टता और सटीकता से बयां कर रही है। साथ ही तत्कालीन सीवान के व्यापार परिदृश्य और मार्गों पर भी प्रकाश डाल रही है।आवश्यकता इन पांडुलिपियों के के तथ्यों के इतिहास के साथ मिलान की थी। शिक्षाविद् सह सामाजिक कार्यकर्ता श्री गणेश दत्त पाठक, केंद्रीय विद्यालय सीवान के शिक्षक चंदन कुमार ने पांडुलिपियों को देखा और उसके ऐतिहासिक महत्व के पड़ताल हेतु भरपूर परिश्रम किया।

सीवान के जिलाधिकारी श्री विवेक रंजन मैत्रेय ने इस प्रयास की सराहना करते हुए आम जनता से कहा कि अपने घर में मौजूद पांडुलिपियों को लोग ढूंढे, जो 75 साल से पुरानी हस्तलिखित हो तथा जिसका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या साहित्यिक महत्व हो।
रविवार को सीवान के ज़िला पदाधिकारी श्री विवेक रंजन मैत्रेय ने बाबुनिया रोड स्थित सामाजिक कार्यकर्ता मुहम्मद फरीद , ज़िला शांति समिति सदस्य उमैर फरीद, एमन फरीद के घर रूह आफ़जा मंजिल पर 200 से ज्यादा वर्ष की प्राचीन पांडुलिपियों का बारीकी से अवलोकन किया। फिर उनके निर्देश पर इन पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड किया गया।
ये पांडुलिपियां बता रही है कि तत्कालीन सीवान सोरा यानी साल्टपीपर के उत्पादन में अग्रणी था, जिससे गन पावडर और कपड़ा धोने वाला पाउडर इंग्लैंड में बनता था। जिसको हमारे ग्रामीणों विशेषकर नोनिया समाज से लेकर रघुनाथपुर के रास्ते सरयू नदी के द्वारा कोलकाता से इंग्लैंड तक भेजा जाता था। जिससे तत्कालीन दौर के यहां के कुछ व्यापारी काफी संपन्न थे।
1880 के करीब साल्ट पीटर के व्यवसाय की पूरी व्यवस्था इन पांडुलिपियों से बयां हो रही है। कहां से कैसे शोरा आता था किस मार्ग से शोरा इंग्लैंड जाता था? व्यापारिक मार्ग क्या था? इस संपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य की पुष्टि फरीद बाबू के यहां मिले पुराने कागज के पन्ने बता रहे थे। सीवान जिलाधिकारी श्री विवेक रंजन मैत्रेय ने फरीद परिवार के प्रति पांडुलिपियों को साझा करने में सहयोग के लिए आभार जताया और सांस्कृतिक संस्था रसमंजरी फाउंडेशन, सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दत्त पाठक, केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक चंदन कुमार के ऐतिहासिक तथ्यों के उद्घाटन के प्रयासों की भरपूर सराहना किया। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद राज कुमार बांसफोर भी उपस्थित थे।
सीवान में ज्ञान भारतम मिशन के तहत संचालित पांडुलिपि खोज अभियान को जिला पदाधिकारी श्री विवेक रंजन मैत्रेय के साथ डीडीसी मुकेश कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह, कला संस्कृति पदाधिकारी शालू कुमारी, स्थापना उप समाहर्ता जूली कुमारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री बालेंदु नारायण पांडेय, जिला जनसंपर्क अधिकारी श्री कन्हैया प्रसाद, सिवान बीडीओ श्रीमती नीतू प्रियदर्शिनी का निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा हैं।
