ऑस्ट्रेलिया ने भारत की तीन प्राचीन कलाकृतियां लौटाने की घोषणा की है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं। इस मौके पर ऑस्ट्रेलिया ने आज गुरुवार, 9 जुलाई को घोषणा की है कि वे भारत की तीन प्राचीन कलाकृतियां लौटाएंगे। इन तीन कलाकृतियों में देवी भद्रकाली की छवि वाला धातु का एक औपचारिक त्रिशूल, नंदी की पत्थर की मूर्ति और छह सिर वाले कार्तिकेय की पत्थर की मूर्ति शामिल है।
भारत आएंगी प्राचीन मूर्तियां
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने बताया, ‘दोस्ती की भावना के तहत, ऑस्ट्रेलिया स्वेच्छा से सांस्कृतिक महत्व की कई वस्तुएं भारत को लौटाएगा, जो पहले ‘नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया’ और ‘आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स’ के संग्रह में रखी गई थीं।’ यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया की तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचने के एक दिन बाद की गई। पीएम मोदी का भारतीय समुदाय के लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य स्वागत किया।
देवी भद्रकाली वाला त्रिशूल: देवी भद्रकाली की छवि वाला एक औपचारिक त्रिशूल, जो शैव-शक्ति परंपराओं में सुरक्षा, दैवीय शक्ति और बुराई के विनाश का प्रतीक है। यह तमिलनाडु के कोल्लुमंगुडी स्थित श्री काशीविश्वनाथस्वामी मंदिर से संबंधित है और 13वीं-16वीं शताब्दी ईस्वी का है।
छह सिर वाले कार्तिकेय की पत्थर की मूर्ति: चोल-काल की यह मूर्ति कार्तिकेय (जिन्हें मुरुगन या षणमुख भी कहा जाता है) को छह सिरों के साथ दिखाती है, जो ज्ञान, वीरता और दैवीय सुरक्षा का प्रतीक हैं। यह मूर्ति तंजावुर जिले के मनमबाड़ी में स्थित नागनाथस्वामी मंदिर से आई है, जिसे 11वीं सदी की शुरुआत में राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल में बनवाया गया था।
नंदी की पत्थर की मूर्ति: यह मूर्ति भगवान शिव के पवित्र बैल और वाहन (सवारी) नंदी को दर्शाती है, जिन्हें पारंपरिक रूप से भक्ति, शक्ति और धर्म के प्रतीक के रूप में मंदिर के गर्भगृह की ओर मुख करके स्थापित किया जाता है। यह कोल्लुमंगुडी के श्री काशीविश्वनाथस्वामी मंदिर से भी आई है और 13वीं-16वीं सदी की है।
-1783602339854.jpg)
भारत वापस करेगा ऑस्ट्रेलिया व्यक्ति के अवशेष
मीडिया को संबोधित करते हुए, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने घोषणा की कि ऑस्ट्रेलिया के ‘फर्स्ट नेशंस’ (मूल निवासी) समुदाय के एक व्यक्ति के अवशेष भारत वापस करेगा, जो मौजूदा समय में चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में रखे हैं।
अल्बानीज ने कहा, ‘मैं चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में रखे गए ऑस्ट्रेलिया के फर्स्ट नेशंस समुदाय के एक पूर्वज के अवशेषों को वापस लाने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करता हूं। भारत स्वेच्छा से और बिना किसी शर्त के इन अवशेषों को उनके पारंपरिक संरक्षकों को सौंप देगा।’
एंथनी अल्बानीज ने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया और भारत का इतिहास गहरा है और हम अपने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।’
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, ‘फर्स्ट नेशंस’ समुदाय के पूर्वज के अवशेषों की वापसी से हीलिंग (घाव भरने), न्याय और सुलह को बढ़ावा मिलता है। मैं ‘फर्स्ट नेशंस’ समुदाय के पूर्वज के अवशेषों को उनके पारंपरिक संरक्षकों को वापस करने के फैसले के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करता हूं।’
