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तनाव के बावजूद घरेलू गैस की सप्लाई बरकरार

तनाव के बावजूद घरेलू गैस की सप्लाई बरकरार

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद देश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। सोमवार को पांच किलोग्राम के 1.10 लाख एलपीजी सिलिंडरों की बिक्री हुई, जिससे 23 मार्च से अब तक इनकी कुल संख्या 14.30 लाख हो गई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में भी 98 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने लिए उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त प्रमाणीकरण कोड (डीएसी) के आधार पर डिलीवरी भी लगभग 92 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

इसके अलावा मार्च 2026 तक लगभग 4.40 लाख पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, और 4.88 लाख अतिरिक्त ग्राहकों ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। इसके अलावा 33,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन वापस किए हैं।मंत्रालय ने नागरिकों को घबराहट में खरीदारी करने से बचने और डिजिटल बुकिंग प्लेटफार्मों का उपयोग करने की सलाह दी है।

साथ ही कहा है कि सरकार सभी प्रयास कर रही है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उसने बताया कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति वर्ता आगे बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई पर संकट बढ़ता जा रहा है. एलपीजी की सप्लाई के लिए भारत भी काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमने से और ईरान-इजराइल के बीच चल रहे तनाव से इस क्षेत्र में एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे गैस और तेल के जहाजों की आवाजाही कम हो गई है जिसका साफ-साफ असर भारत को आने वाली LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है.
भारत अभी भी LPG के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. देश की कुल खपत का करीब 60% हिस्सा विदेशों से आने वाली सप्लाई से पूरा होता है, जिससे वैश्विक हालात का सीधा असर भारत पर पड़ता है. एलपीजी सप्लाई की टेंशन के बीच ग्राहकों के लिए एक जरूरी खबर है.

कब होगी एलपीजी सप्लाई होगी सामान्य?

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी है कि मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते ग्लोबल LPG सप्लाई चेन जो प्रभावित हुई है, उसे पूरी तरह सामान्य होने में कई साल लग सकते हैं. अभी यह साफ नहीं है कि प्रोडक्शन सिर्फ अस्थायी रूप से रुका है या कहीं स्थायी नुकसान हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रभावित सप्लायर्स से मिली जानकारी के आधार पर LPG सप्लाई को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम 3-4 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि इससे भारत के लिए आयात का रिस्क और लागत का दबाव दोनों बढ़ सकते हैं.

LPG की सामान्य सप्लाई में कितनी कमी बनी रहेगी?

Rubix Data Sciences और Vayana TradeXchange की रिपोर्ट के मुताबिक, सप्लाई का रास्ता बदलने और दूसरे सोर्स से गैस लेने के बाद भी LPG की सामान्य सप्लाई में 40–50% तक की कमी बनी रह सकती है. यानी पूरी कोशिशों के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाएगी. सरकार का ध्यान इस समय इस बात पर है कि घरों में LPG की सप्लाई लगातार बनी रहे. इसके लिए सरकार नए सोर्स से गैस खरीदने और कमी को कम करने के उपाय तलाश रही है.
अधिकारी ने बताया कि कुछ बहुत जरूरी LPG सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई है. हालांकि, यह साफ नहीं है कि प्रोडक्शन पूरी तरह रुक गया है या गैस के सोर्स खत्म हो गए हैं, लेकिन सप्लायर्स का कहना है कि इसे ठीक होने में कम से कम 3 साल लगेंगे.

सरकार का एलपीजी के लिए प्लान

सरकार COVID के समय अपनाए गए उपायों की तरह फिर से ऑप्शनल व्यवस्था कर रही है. इसमें अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाना, सप्लाई के रास्ते बदलना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और मांग को नियंत्रित करना शामिल है, ताकि आम लोगों को गैस की कमी महसूस न हो.
आपको बता दें कि युद्ध से पहले करीब 90% LPG सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती थी, लेकिन 24 मार्च तक यह हिस्सा घटकर 55% रह गया है. इससे साफ है कि सप्लाई में रुकावट आई है और भारत अब दूसरे ऑप्शन की तलाश भी कर रहा है.

एलपीजी की भारत में मांग

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 33 मिलियन टन LPG की मांग है, लेकिन देश के पास सिर्फ 15 दिनों की खपत जितना ही स्टोरेज है. ऐसे में सप्लाई के सोर्स बदलने से कम समय में गैस की कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा बढ़ गया है.
भारत की LPG सप्लाई का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान मिलकर भारत की करीब 92% LPG सप्लाई करते हैं, जिसकी कुल कीमत लगभग 6 अरब डॉलर है. इसमें UAE का हिस्सा 41% और कतर का 22% है.
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महंगी LPG का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार (MSME) पर पड़ रहा है. वहीं, घरेलू सिलेंडर पर सरकार को ज्यादा सब्सिडी देनी पड़ सकती है. भारत भले ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात करता है, लेकिन LPG जैसे ईंधन के लिए अभी भी आयात पर निर्भर है, जिससे ग्लोबल कीमतों और सप्लाई के जोखिम का असर सीधे देश पर पड़ता है.

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