बिहार में सम्राट चौधरी कैसे मोदी-शाह के भरोसेमंद नेता बने?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है. सम्राट चौधरी को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है और वे राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे. उनकी राजनीति का सफर काफी दिलचस्प रहा है. एक समय वे लालू प्रसाद यादव की टीम का हिस्सा थे और आज नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं.
सम्राट चौधरी का जीवन परिचय
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ. उनके पिता शकुनी चौधरी और माता पार्वती देवी हैं. सम्राट अभी मुंगेर के तारापुर सीट से विधायक हैं और वे MLC भी रहे हैं. उन्हें प्रशासनिक और विधायी कार्यों का अच्छा अनुभव है. वे दो बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं. 2024 में उन्हें वित्त मंत्री की जिम्मेदारी मिली, वहीं नवंबर 2025 में गृह मंत्रालय का भी कमान सौंपा गया.
बीजेपी में तेजी से बढ़ा कद
ओबीसी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से ताल्लुक रखते हैं. वे 2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे. उसी साल नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़कर एनडीए में आए थे, तब सम्राट को पंचायती राज मंत्री बनाया गया था.
सिर्फ 9 साल में उन्होंने बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी में मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया. अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़ा, तब बीजेपी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया. उन्होंने इस जिम्मेदारी को मजबूती से निभाया.
RSS बैकग्राउंड नहीं, फिर भी संगठन में मजबूत पकड़
सम्राट चौधरी उन नेताओं में हैं, जिनका आरएसएस बैकग्राउंड नहीं है. उनके पिता समता पार्टी से जुड़े रहे और नीतीश कुमार व लालू प्रसाद यादव दोनों के करीबी माने जाते थे. सम्राट चौधरी ने 1990 में राजनीति में कदम रखा और 1995 में 89 दिनों के लिए जेल भी गए थे. जब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री थे और नीतीश कुमार से मतभेद हुआ था, तब सम्राट चौधरी ने कुछ विधायकों के साथ मांझी का समर्थन किया था. इससे उनकी अलग पहचान बनी.
‘मुरेठा’ वाली प्रतिज्ञा से चर्चा में
सम्राट चौधरी तब सबसे ज्यादा चर्चा में आए जब उन्होंने नीतीश कुमार को सीएम पद से हटाने तक पगड़ी (मुरेठा) नहीं उतारने की प्रतिज्ञा ली थी. वे हर सार्वजनिक कार्यक्रम में पगड़ी बांधे नजर आते थे. इस पर कई नेताओं ने तंज भी कसा.
राम मंदिर दर्शन के बाद उतारी पगड़ी
जब नीतीश कुमार फिर से एनडीए में लौटे और सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम बने, तब उन्होंने राम मंदिर अयोध्या में दर्शन के बाद अपनी पगड़ी उतारी. इसी के बाद से पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा और मजबूत हुआ. बीजेपी ने जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया, तब पार्टी को बिहार में मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने संगठन को मजबूती दी और लगातार एक्टिव राजनीति में बने रहे. यही वजह है कि आज वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में शामिल हैं.
सामाजिक समीकरण में भी फिट बैठते हैं सम्राट
सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं, जिसकी बिहार में अच्छी खासी आबादी है. ऐसे में वे सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी एनडीए के लिए मजबूत चेहरा माने जाते हैं. बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है. अब देखना होगा कि वे अपने अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के दम पर राज्य को किस दिशा में ले जाते हैं.
30 अक्टूबर 2025 को जब अमित शाह मुंगेर के तारापुर में सम्राट चौधरी के लिए प्रचार करने आये थे तो उन्होंने कहा था, “मैं जहां भी जाता हूं लोग मुझसे कहते हैं कि मेरे विधायक को मंत्री बना दीजिए. लेकिन तारापुर की जनता को बना बनाया उपमुख्यमंत्री मिला है. आप उसे यहां से प्रचंड मतों से विजय बना के पटना भेजे और भरोसा रखिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे.”
अमित शाह के इस बयान से उस समय कोई अंदाजा नहीं लगा पाया था कि वो सम्राट चौधरी को बिहार का अगला सीएम बनाने की बात कह रहे हैं. आज नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद जब बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया तो अमित शाह के इस बयान का जिक्र होना लाजिमी है.
सम्राट चौधरी के बारे में जानिये
मुंगेर जिले की तारापुर सीट से विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी अब बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. बिहार भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम को मंजूरी मिल गई है. इसके साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की तस्वीर साफ हो गई है.
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है. उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत राजद से की थी, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल होकर तेजी से आगे बढ़े. आज वह बिहार भाजपा के सबसे मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं.
उनकी पहचान एक तेजतर्रार नेता और मजबूत रणनीतिकार के रूप में बनी है. संगठन और सरकार दोनों स्तर पर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है. यही वजह है कि पार्टी ने उन पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
सम्राट चौधरी की पढ़ाई बिहार में हुई. बाद में उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की. उनकी शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) को लेकर कई बार चर्चा हुई, लेकिन उन्होंने हमेशा कहा कि उनकी असली पहचान उनका प्रशासनिक अनुभव और जनता के बीच काम है. तारापुर विधानसभा क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. यह इलाका लंबे समय से उनके परिवार का राजनीतिक गढ़ रहा है.
राजनितिक सफर कैसा रहा
1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा. पहले विधायक बने, फिर बिहार सरकार में कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. बाद में नगर विकास, आवास और पंचायती राज जैसे अहम विभागों का काम भी देखा.
भाजपा में आने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा. उन्हें बिहार भाजपा अध्यक्ष बनाया गया और फिर 2024 में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली. 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद भी वह डिप्टी सीएम बने रहे. अब नीतीश कुमार के बाद वह राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.
सम्राट चौधरी की ताजपोशी के साथ बिहार में राजनीति का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. भाजपा पहली बार राज्य में अपने दम पर मजबूत नेतृत्व के साथ नई दिशा देने की तैयारी में है.
