जीवनदायिनी मही नदी को मनुष्यों ने दिया अच्छा सिला, नदी से बना दिया नाला*
नदी जरूरी या नाला ? नाला के दूषित पानी से संक्रमण की संभावना
जल ही जीवन है! जल है,तो कल है!
श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर,सारण।(बिहार)

सारण जिला के अमनौर प्रखंड के सैकड़ों गांव “मही नदी” के किनारे बसे हुए हैं। इन बसे गांवों के जीव, जंतु और पेड़ पौधों के जीवन दायिनी हुआ करती थी, वर्षों पहले मही नदी में सालोंभर पानी रहता था। मही नदी भैंसालोटन से निकल कर सारण जिला के दिघवारा के पास गंगा नदी में मिलतीं है। नदी के पानी से किनारे बसे गांवों के लोग अपने खेतों की सिंचाई, छठ पूजा ,स्नान व कपड़ा धोने सहित अनेकों काम किया करते थे ।
माल-मवेशी भी अपना प्यास बुझाने का काम करतें थे। आज इस नदी में चुटकी भर पानी नहीं है,साथ ही बरसात के समय आए गाद से नदी पुरी तरह भर गया है और जंगलझार उग आए हैं । आस-पास के गांव वाले अपने घरों का कूड़ा -कचरा भी अब नदी में ही डाल कर इसे डस्टबिन बना दिया है।

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि अमनौर बाजार सहित आस-पास के मुहल्ला के नाला और शौचालय का गंदा पानी अब नदी में प्रवाहित हो रही है। नाले का गंदा पानी से नदी अब नाला का रूप धारण कर लिया है।
नदी में सालों भर पानी रहने से किनारे बसे गांव का जलस्तर बमुश्किल बीस फीट के आस-पास था। नदी के सूखने से आस-पास के गांव में जमीन के नीचे पानी का जलस्तर काफ़ी नीचे चला जाएगा और आनेवाले समय में पानी की घोर किल्लत होने की पुरी संभावना है।
नदी में नाला का दूषित पानी डालना अपराध की श्रेणी में:-
दूसरी ओर नदी में नाला और शौचालय का गंदा पानी जो डाला जा रहा है यह अपराध की श्रेणी मे आता है क्योंकि इस तरह के गंदा पानी को नदी में सीधे नहीं बहाया जा सकता है। नाला का गंदा व दूषित पानी सिवरेज होकर जमीन के नीचे जाएगा और चापाकल का पानी भी संक्रमण युक्त हो सकता है। संक्रमण युक्त पानी का सेवन करने से मनुष्य अनेकों बिमारी के शिकार हो सकते हैं। नाला के पानी को सीधे नदी में नहीं डालकर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के माध्यम से साफ़ कर ही बहा सकते हैं।
बाढ़ की संभावना : नदी के समाप्त होते अस्तित्व से आस-पास के गांव में बाढ़ की भी संभावना है क्योंकि बरसात में अधिक बारिश होने की स्थिति में नदी ही बरसात के पानी को सीधे गंगा में प्रवाहित करने का काम करता था। नदी में गाद और जंगल के उग जाने से नदी पुरी तरह भर गया है इसे साफ करने की आवश्यकता है।
ऐसे तो सारण जिला को गंगा,गंडक,दाहा,दही,डबरा और मही नदी सहित अनेकों नदियों की ईश्वरीय वरदान प्राप्त है। परन्तु मही नदी का अस्तित्व समाप्त हो रहा है।
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