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लहेजी में श्रद्धाभाव से निकली कलश यात्रा

लहेजी में श्रद्धाभाव से निकली कलश यात्रा

नवचंडी यज्ञ सह श्रीराम कथा ज्ञान गंगा हो रही प्रवाहित

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सीवान जिले के हसनपुरा प्रखंड के लहेजी गांव में इन दिनों आस्था और श्रद्धा की अविरल गंगा प्रवाहित हो रही है। गुरुवार को यहां के मंदिर से एक कलश यात्रा श्रद्धा भाव से निकली, जो गांव के ही श्री काशीनाथ मिश्रा के घर तक गई। यहीं पर गुरुवार से नव चंडी यज्ञ का भी शुभारंभ हुआ। यहां रात्रि में पंडित आदिशक्ति तिवारी जी महाराज द्वारा लालित्यपूर्ण, रसमयी श्रीराम कथा का वाचन भी प्रारंभ हुआ। यज्ञाचार्य पंडित विश्वजीत तिवारी जी महाराज हैं। कथा के यजमान श्री काशी नाथ मिश्रा, श्री मुरारी मिश्रा, प्रवीण मिश्रा सहित परिवार के अन्य सदस्य हैं।

गुरुवार को लहेजी में निकली कलश यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। महिला श्रद्धालुओं का आस्था और श्रद्धा से सराबोर उत्साह, उमंग और उल्लास की बहती त्रिवेणी एक अदभुत दृश्य को उत्पन्न कर रही थी। यज्ञाचार्य पंडित विश्वजीत तिवारी जी महाराज ने बताया कि सनातनी परंपरा में कलश एक बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक है। कलश को शुद्धता, पवित्रता, शुभता, परमात्मा का प्रतीक माना जाता रहा है। कलश जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता रहा है। उन्होंने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान के तौर पर कलश यात्रा आध्यात्मिक शुद्धि, देवी देवताओं का आशीर्वाद प्रदान करके पुण्य में सहभागिता का सुअवसर प्रदान करती है।

गुरुवार को यहां कलश यात्रा के उपरांत नवचंडी महायज्ञ भी शुरू हुआ। यज्ञाचार्य श्री विश्वजीत तिवारी जी महाराज ने बताया कि नवचंडी यज्ञ एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें देवी चंडी की पूजा की जाती है। यह यज्ञ व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, शांति, समृद्धि और सफलता प्रदान करनेवाली मानी जाती है। इस यज्ञ से नकारात्मक शक्तियों का विकास सुनिश्चित होता है।

गुरुवार को लहेज़ी गांव में पंडित आदिशक्ति तिवारी जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम का वाचन भी प्रारंभ हुआ। श्री राम चरित मानस की आरती यजमानगण श्री काशीनाथ मिश्रा, श्री मुरारी मिश्रा और श्री प्रवीण मिश्रा द्वारा किया गया। पहले दिन की कथा सुनने स्थानीय ग्रामीणजन पहुंचे। पहले दिन महाराज जी ने श्रीराम चरित मानस की कथा के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि इसको सुनने से मन को शांति और अद्वितीय सुकून मिलता है। उन्होंने कहा कि सत्संग की प्राप्ति प्रभु श्रीराम की इच्छा से ही प्राप्त होती हैं। श्रीराम कथा के श्रवण से जिंदगी में कई तथ्यों के संदर्भ में सकारात्मक मार्गदर्शन मिलता है।

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