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विदेशी फंडिंग के बयान को गलत तरीके से किया गया पेश

विदेशी फंडिंग के बयान को गलत तरीके से किया गया पेश

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

 विदेश मंत्रालय ने रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस पोस्ट को भ्रामक करार दिया है, जिसमें यह दावा किया गया था कि मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हो रहे युवाओं के विरोध प्रदर्शन के पीछे किसी भी विदेशी फंडिंग के होने से इनकार किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में यह दावा किया गया था कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में कहा है कि मुझसे कई बार CJP के विरोध प्रदर्शन की फंडिंग के बारे में पूछा गया है। मैं यह बताना चाहता हूं कि हमारी खुफिया और जांच रिपोर्ट बताती है कि इसमें कोई विदेशी फंडिंग नहीं है।

मंत्रालय ने दावे का किया खंडन

विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक यूनिट ने एक्स पर इस भ्रामक दावे का खंडन करते हुए जायसवाल का असली बयान साझा किया। फैक्ट-चेक यूनिट ने लिखा कि यह पोस्ट भ्रामक है और प्रवक्ता के बयान को गलत तरीके से पेश करती है।

शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जब एक पत्रकार मधु ने विदेशी फंडिंग से जुड़ा सवाल पूछा था, तो जायसवाल का वास्तविक जवाब था कि मधु, आपने विदेशी फंडिंग और मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के संबंध में जो आरोप उठाए हैं, उस पर मैं यह कहना चाहूंगा कि फिलहाल मेरे पास इस विषय पर आपसे साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है।

क्या है कॉकरोच जनता पार्टी?

सीजेपी मूल रूप से ऑनलाइन व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म है। इसकी शुरुआत भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं के एक वर्ग का वर्णन करने के लिए कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया था। हालांकि, बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था।

सीजेपी पर विदेशी फंडिंग के आरोप मुख्य रूप से इसके संस्थापक अभिजीत दिपके के बैकग्राउंड से जुड़े हैं। दिपके बोस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने बोस्टन में ही सीजेपी की स्थापना की थी और मई में हुए नीट (यूजी) पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए वे जून में भारत लौट आए थे।

गौरतलब है कि सीजेपी के इस आंदोलन और देश के अन्य हिस्सों में हुए लगातार प्रदर्शनों के दबाव के चलते, तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कथित नीट (यूजी) प्रश्न पत्र लीक और अन्य संबंधित विवादों को लेकर अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को नोएडा से जोड़कर भ्रामकता फैलाने का भी प्रयास हो रहा है। नोएडा में वर्करों और युवती को पीटने, चिल्लाने व सेक्टर 63 बाॅर्डर जाम होने की पोस्ट की झूठी जानकारी प्रसारित की जा रही हैं। नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने संज्ञान लेकर इंस्टाग्राम के जंतर-मंतर लाइव 24 सच की बात जेन जेड, चर्चा जंक्शन न्यूज व ट्रुथफुल क्रिटिकल अकाउंट के खिलाफ दो मामले दर्ज कराए हैं।

पुलिस के मुताबिक 22 जुलाई को इंस्टाग्राम अकाउंट जंतर-मंतर लाइव 24 सच की बात जेन जेड के नाम से अकाउंट से एक भ्रामक वीडियो पोस्ट किया गया। उसके टाइटल में लिखा कि नोएडा में क्या हो रहा है। सेक्टर 63 में 45 हजार से अधिक श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे। सेक्टर 63 और चिल्ला बाॅर्डर पर यातायात प्रभावित हो रहा।

राज्य सरकार ने मांगों के अनुसार वेतन में वृद्धि कर चुकी, लेकिन कुछ समूह अब भी इसे हवा देकर कानून व्यवस्था खराब करने में जुटे हैं। वर्तमान में कोई भी आंदोलन नोएडा में नहीं चल रहा है। पुलिस ने इस पोस्ट को फर्जी और भ्रामक बताया। इसे कानून व्यवस्था खराब करने की कोशिश माना है। उधर, इंस्टाग्राम अकाउंट चर्चा जंक्शन न्यूज और एक्स पर बने ट्रूथफुल क्रिटिकल नामक अकाउंट से भी इसी तरह के भ्रामक पोस्ट किए गए।

वीडियो पोस्ट कर कथित वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा आम लोगों के साथ अभद्र और कठोर व्यवहार दिखाया गया। साथ ही यह भी लिखा गया है कि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। वीडियो कब का है, किस घटना से जुड़ा है और पूरा घटनाक्रम क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। क्या पुलिस की कार्रवाई उचित थी या मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों से टिप्पणी भी करने के लिए कहा गया।

ह्यूमन राइट्स, पुलिस व मीडिया हाउस को टैग किया गया। पुलिस वीडियो प्रसारित करने के पीछे सुनियोजित साजिश होना मान रही। इसका मकसद भ्रामक नैरेटिव तैयार कर लोगों को भड़काना है। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों से भी अपील की है कि किसी भी पोस्ट व वीडियो को बिना पुष्टि के आगे भेजने से बचें।

 

 

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