सीवन जिला सहित दारौंदा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में वैशाख कृष्ण पक्ष की पावन वरुथिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 13 अप्रैल, सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, और वरुथिनी एकादशी को सुख-समृद्धि, पापों से मुक्ति तथा सौभाग्य प्रदान करने वाली तिथि के रूप में जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से न केवल इस जन्म बल्कि पिछले जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिलती है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। दिनभर उपवास रखकर शाम को कथा-श्रवण और आरती के बाद अगले दिन व्रत का पारण करते है।
कई श्रद्धालु इस दिन दान-पुण्य भी करते हैं, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है।
स्थानीय मंदिरों में भी इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है।
पंडितों के अनुसार, एकादशी के दिन सात्विक आहार और संयम का पालन करना चाहिए तथा मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करना चाहिए।
लोंग अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करते हैं।
वरुथिनी एकादशी का पर्व आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण व्रत है।