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कहां अटक गया मानसून और कैसे रुकी इसकी रफ्तार?

कहां अटक गया मानसून और कैसे रुकी इसकी रफ्तार?

दस्तक देने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 11 दिनों से तेलंगाना पर अटका हुआ है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

देश के 19 राज्यों में दस्तक देने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अचानक थम गई है। पिछले 11 दिनों से यह तेलंगाना के ऊपर ही ठहरा हुआ है, जिसके कारण उत्तर और मध्य भारत के करीब सात राज्य झमाझम बारिश के लिए तरस रहे हैं।

इस ठहराव का सीधा असर बारिश के आंकड़ों पर पड़ा है। 1 से 18 जून के बीच पूरे देश में सामान्य से लगभग 38% कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की इस कमी की सबसे ज्यादा मार गुजरात और महाराष्ट्र झेल रहे हैं।

कैसे और क्यों रुका मानसून?

मौसम विभाग के अनुसार, एक ही समय पर पांच अलग-अलग मौसमी बदलावों ने मानसून की राह रोक दी है। इस ब्रेक का सबसे बड़ा कारण अरब सागर से उठने वाली नमी युक्त हवाओं का कमजोर पड़ना है, जो आमतौर पर मानसूनी बादलों को भारतीय भूभाग में आगे धकेलती हैं।

इसके साथ ही, अरब सागर के ऊपर दक्षिण-पश्चिमी हवाएं सुस्त पड़ गई हैं, जिससे महाराष्ट्र और उससे सटे इलाकों में पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है।

भूमध्य रेखा को पार करके आने वाली हवाओं में भी नमी लगभग खत्म हो चुकी है। मानसून को आगे ले जाने के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में जो लो-प्रेशर का क्षेत्र बनना चाहिए था, वह भी इस समय नदारद है।

इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारत से बादलों को उत्तर की ओर खींचने वाला मौसमी सिस्टम मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल कमजोर स्थिति में है। इन सभी कारकों ने मिलकर मानसून को तेलंगाना के पास रोक दिया है।

  • अरब सागर से नमी का अभाव: आमतौर पर अरब सागर से उठने वाली नमी युक्त हवाएं मानसून को मजबूती देती हैं, लेकिन फिलहाल ये हवाएं काफी कमजोर पड़ गई हैं।
  • सुस्त दक्षिण-पश्चिमी हवाएं: अरब सागर के ऊपर इन हवाओं के कमजोर होने से महाराष्ट्र और इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है।
  • कमजोर क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो: भूमध्य रेखा को पार करके आने वाली हवाओं में नमी की मात्रा लगभग खत्म हो गई है, जिससे मानसूनी बादल आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
  • लो-प्रेशर सिस्टम की कमी: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर, दोनों ही जगहों पर फिलहाल कोई मजबूत कम दबाव का क्षेत्र नहीं बन रहा है।
  • MJO का कमजोर होना: मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) एक ऐसा सिस्टम है जो बादलों को दक्षिण से उत्तर की ओर धकेलता है। इसका कमजोर पड़ना भी मानसून की सुस्ती का बड़ा कारण है।

बारिश के इंतजार में तप रहे राज्य

मानसून के अटकने से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में भीषण गर्मी का दौर जारी है। हालांकि इन राज्यों में प्री-मानसून की हल्की बौछारें जरूर पड़ी हैं, लेकिन राहत नाकाफी है और पारा अभी भी 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के बांदा, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी और ओडिशा के बौध जैसे इलाकों में तापमान 42 से 43 डिग्री के बीच झुलसा रहा है।

इस बीच, अमेरिकी मौसम एजेंसी ने भी सैटेलाइट डेटा के आधार पर चिंताजनक संकेत दिए हैं। उनके मुताबिक, इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन के सुस्त रहने के कारण मानसूनी हवाएं नमी नहीं खींच पा रही हैं। इसके अलावा, अल नीनो की स्थितियां भी आकार ले रही हैं, जिसके कारण आने वाले समय में देश के कुछ हिस्सों में सूखे या असमान बारिश का सामना करना पड़ सकता है।

अगले दो दिनों के मौसम का मिजाज

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 20 और 21 जून को पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत (सिक्किम, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार) में भारी बारिश की संभावना है।

वहीं, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और हल्की बारिश की स्थिति बन सकती है। दक्षिण भारत में कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।

जेट स्ट्रीम कमजोर पड़ने पर मिलेगी रफ्तार

अब सवाल यह है कि मानसून दोबारा आगे कब बढ़ेगा? मौसम विभाग का मानना है कि इस समय वायुमंडल की ऊपरी परतों (8 से 15 किमी की ऊंचाई) में बहने वाली बहुत तेज हवाएं यानी जेट स्ट्रीम मानसून को प्रभावित कर रही हैं।

जैसे ही जेट स्ट्रीम का यह मौजूदा पैटर्न कमजोर पड़ेगा, मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने की जगह और ताकत मिलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 4 से 5 दिनों में परिस्थितियां अनुकूल होंगी और मानसून महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों की ओर फिर से अपनी यात्रा शुरू करेगा।

 

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