सोने, चांदी के आभूषणों की तरह टेराकोटा के गहनों का गढ़ा गया पारंपरिक प्रचलन
जिला सिवान के आराध्या चित्रकला में निर्मित हो रहे टेराकोटा के गहने।
तीन हजार वर्ष पूर्व कुलीन परिवार पहनते थे टेराकोटा के गहने।
श्रीनारद मीडिया, जीरादेई, सीवान (बिहार): ।

सीवान जिला के जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के विजयीपुर निवासी प्राचार्य सह शोधार्थी डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने टेराकोटा से निर्मित गहना को अपने बेटे शिवम कुमार राजा (चीफ ऑफिसर मर्चेंट नेवी) के शादी में चढ़ावा पर गत दिन बुधवार को ले गए थे ।
इस गहने का निर्माण आराध्या चित्रकला संस्थान सिवान के निदेशक युवा चित्रकार रजनीश कुमार मौर्य के नेतृत्व में कलाकार नेहा कुमारी ने तैयार किया था। युवा चित्रकार सह चित्रकला शिक्षक रजनीश ने बताया कि आराध्या पीपुल्स फाउंडेशन के अध्यक्ष सह प्राचार्य डॉ कृष्ण कुमार सिंह के पुत्र के शादी में सोना,चांदी, हीरा के गहनो के साथ ही मिट्टी से बने टेराकोटा आभूषण को प्रमुखता से देना पुरातन संस्कृति एवं परंपरा को पुनः जीवंत करने का अनूठा प्रयास है। उन्होंने बताया कि सिवान प्राचीन काल से ही टेराकोटा से निर्मित सुराही एवं अन्य सामग्रियों के लिए विख्यात है। पटना म्यूजियम के साथ ही लंदन में भी सिवान के टेराकोटा का जलवा है।
कुमार ने ये भी बताया कि मिट्टी से बने पात्र स्वयं में पवित्र होते हैं इसी कारण इनका प्रथम उपयोग किसी भी शुभ कार्य में होता है यानी जिस विद्या के लिए इसका प्रयोग किया जाए उसके लिए यह सबसे स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक होता है, क्योंकि इसमें लगभग 14 प्रकार के प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो पोशाक हैं, जैसे मिट्टी के पात्र में रखें पानी स्वयं में ताजा और पोशाक से भर जाता है। वैज्ञानिकों ने ऐसा माना है की शरीर के त्वचा पर स्पर्श करने वाले तमाम वस्तुओं का आंशिक रूप हमारे शरीर में निरंतर प्रवेश करते रहता है, जो टेराकोटा के बने आभूषण से इसका लाभ लिया जा
सकता है। शोधार्थी सह इतिहासकार डॉ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में पपौर तथा 2018 में तितिर स्तूप का भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा परीक्षण उत्खनन में मौर्य, कुषाण तथा गुप्तकाल के टेराकोटा का गहना (मनका) एवं मृदभांड मिलना टेराकोटा का पुरातात्विक प्रमाण प्रस्तुत करता है, टेराकोटा के महत्व को जीवंत करने के उद्वेश्य से अपने पुत्र के शादी में पुत्रवधू के लिए मिट्टी से बने टेराकोटा के गहने भी चढ़ावा में ले गए थे, जिस प्रकार सोना ,चांदी एवं हीरा के गहने का पूजन हुआ
उसी प्रकार टेराकोटा के गहने का भी पूजन हुआ। उन्होंने बताया कि टेराकोटा के गहने को बहुत सराहा गया तथा दर्जनों साथियों ने इस गहने का निर्माण के लिए संपर्क किया। कलाकार नेहा कुमारी ने बताया कि टेराकोटा के गहना का निर्माण करने में एक से दो माह का समय लगता है तथा इसका चमक सोने ,चांदी और हीरे की तरह हो इसके लिए ग्लेज चढ़ा कर उच्च तापमान की जरूरत पड़ती है, जिसे इसका चमक सदियों तक बना रहे, इसके एक सतह पर चित्रकारि व पेंट करके सुशोभित किया जाता है और दूसरे सतह को ऐसे ही खाली छोड़ दिया जाता है जिससे शरीर से इसका सीधा संपर्क हो।
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