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मौसम विभाग ने मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी और लू चलने की चेतावनी दी है

मौसम विभाग ने मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी और लू चलने की चेतावनी दी है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

फरवरी की सूखी विदाई के बाद उत्तर भारत में गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दिया है। मार्च के पहले ही सप्ताह में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है।हालात ऐसे बन रहे हैं कि मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी महसूस हो सकती है और कुछ क्षेत्रों में हीटवेव जैसी स्थिति भी बन सकती है। इस बार गर्मी का मौसम जल्दी, लंबा और अधिक तीखा हो सकता है, जिससे आम जनजीवन, कृषि और बिजली मांग पर असर पड़ना तय है।

मौसम विभाग (आईएमडी) का कहना है कि मार्च से मई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक हीटवेव के दिन दर्ज हो सकते हैं। उत्तर भारत के परिप्रेक्ष्य में पश्चिमी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी उत्तर प्रदेश विशेष रूप से संवेदनशील माने जा रहे हैं।

बिहार और झारखंड में भी मार्च के दूसरे पखवाड़े से तापमान में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। अभी भले ही आधिकारिक तौर पर लू की घोषणा न हुई हो, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के कई मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फरवरी में वर्षा 2001 के बाद सबसे कम रही और पूरे महीने देश में कहीं भी शीतलहर दर्ज नहीं की गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि जमीन और वातावरण में ठंडक का भंडार सीमित रह गया। अब जैसे ही उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं सक्रिय हुई हैं, दिन का तापमान तेजी से बढ़ने लगा है।

कई राज्यों में 35 डिग्री के आसपास तापमान

राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने लगा है, जो सामान्य से अधिक है और गर्मी के जल्दी तीव्र होने का संकेत देता है।हालांकि आईएमडी ने यह भी संकेत दिया है कि मार्च में औसत वर्षा सामान्य रह सकती है, जिससे कुछ दिनों के लिए तापमान में अस्थायी राहत मिल सकती है।

तीन मार्च के आसपास एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में वर्षा और बर्फबारी ला सकता है, लेकिन इसका असर उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों में सीमित रहने की संभावना है। मैदानों में व्यापक वर्षा के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं, जिससे तापमान में गिरावट की संभावना कम है।

वैश्विक मौसमी परिदृश्य भी गर्मी को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है। वर्तमान में ला-नीना की स्थिति कमजोर पड़ रही है और समुद्री परिस्थितियां न्यूट्रल चरण की ओर बढ़ रही हैं। मानसून के दौरान अल नीनो विकसित होने की आशंका जताई जा रही है।

गर्मी का प्रकोप होगा तेज

आमतौर पर अल नीनो वर्ष वैश्विक और भारतीय तापमान में वृद्धि से जुड़े रहे हैं। ऐसे में प्री-मानसून अवधि में ही गर्मी का प्रकोप तेज हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मार्च के मध्य तक तापमान में यह बढ़ोतरी जारी रहती है तो उत्तर भारत के कई हिस्सों में लू के हालात समय से पहले बन सकते हैं। धूलभरी आंधियों की शुरुआत भी सामान्य से पहले हो सकती है।

मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 125 सालों के तापमान ट्रेंड को देखते हुए इस बार गर्मी का पैटर्न असामान्य दिखाई दे रहा है. फरवरी में ही तापमान औसत से ज्यादा दर्ज किया गया और ठंड लगभग गायब रही. यही संकेत है कि गर्मी जल्दी और ज्यादा तीव्र रूप में आएगी. मार्च से मई के बीच लू का असर खासतौर पर उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में ज्यादा रहेगा. बुजुर्गों, बच्चों, आउटडोर काम करने वालों और बीमार लोगों के लिए यह मौसम सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा पड़ेगी लू?

  • IMD के अनुसार पश्चिम राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र के कई हिस्से, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर कर्नाटक और उत्तर तमिलनाडु में सामान्य से अधिक हीटवेव दिन दर्ज हो सकते हैं. इन क्षेत्रों में तापमान लगातार ऊंचा बना रह सकता है और गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं.
  • मार्च महीने में हालांकि कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या थोड़ा कम रह सकता है, लेकिन यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी. मौसम विभाग का कहना है कि मार्च में देशभर में औसत बारिश सामान्य रहने की संभावना है, इससे शुरुआती दिनों में थोड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन इसके बाद तापमान तेजी से बढ़ने का अनुमान है.
  • मौसम विभाग ने यह भी बताया कि फिलहाल कमजोर ला नीना (La Nina) स्थितियां बनी हुई हैं, जो आगे चलकर न्यूट्रल ENSO स्थिति में बदल सकती हैं. यही बदलाव गर्मी के पैटर्न को प्रभावित करेगा. फरवरी 2026 में देश में 2001 के बाद सबसे कम बारिश दर्ज की गई और कोई ठंडी लहर नहीं चली. यही वजह है कि जमीन पहले से गर्म हो चुकी है और आने वाले महीनों में हीटवेव की संभावना बढ़ गई है.
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