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महेंद्र मिसिर-एक पूर्ण व्यक्तित्व

महेंद्र मिसिर-एक पूर्ण व्यक्तित्व

जयन्ती पर विशेष आलेख

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

महेंद्र बाबा की जयन्ती है,उन्हें शत शत प्रणाम है।भोजपुरी लोक गीतों में पूर्वी विधा के कुशल चितेरा बाबा हम सबों के प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं,जो किसी प्रकाश स्तंभ की भांति आज भी प्रकाशवान है और जिसकी ज्योति से आज भी भोजपुरी लोक जगत चमकता है।
महेन्दर बाबा एक व्यक्ति ही नहीं थे।उन की विशिष्टताओं पर हर दृष्टि से अगर मंथन हो तो कई ऐसे पहलू दिखेंगे,जो उन्हें विराट स्वरुप प्रदान करता दीख जायेगा।शारीरिक सौष्ठव के धनी बाबा एक कुशल पहलवान थे,जिसकी चर्चा तत्कालीन कुश्ती जगत में बहुत ही आदर के साथ लिया जाता था।वे इस विधा में सिद्धहस्त थे,तभी तो सटे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के पहलवान प्रतियोगिता में आने से कतराते थे।

पहलवान होने के नाते हर रोज का अभ्यास,उन की शारीरिक बनावट को उनको औरों से अलग करती थी।भरा पूरा बदन,चेहरे पर ओज और तेज,लंबा कद काठी उनको आकर्षक बनाती थी।पहली दृष्टि में ही प्रभावित करते थे वे‌सुर के साधक थे वे।उनकी उपलब्ध साहित्यिक रचना की पूरी श्रृंखलाओं का सूक्ष्म अध्ययन बताता है कि वे शास्त्रीय संगीत के कुशल ज्ञाता थे।उनकी कई रचनाएं तो रागों पर आधारित हैं।लय और ताल के पैमानों पर खड़ी उतरतीं हैं।ऋतुओं पर आधारित पारंपरिक लोक धुनों को भी आधार बना कर उन्होंने जो भी साहित्यिक कृतियों को रचा है,वह अनुपम है।

श्रृंगार,विरह या शांत रसों पर केंद्रित उन की रचनाएं उन की संवेदनशीलता की द्योतक हैं।विरह के भावों को शब्दों से अभिव्यक्त करना एक कुशल कवि के सामर्थ्य का बोध कराता है और इस में वे सफल सिद्ध होते हैं।

महेन्दर बाबा विज्ञ थे।वेद-उपनिषदों का अध्ययन भी उन्होंने किया था।इसकी बानगी और इसका प्रभाव उनके अभी तक नहीं छप सकी “अपूर्व रामायण” की रचनाओं में दृष्टिगोचर होता है।पूजारी होने का आधार उनका वेदों से जुड़ना ही है।

वे एक प्रसिद्ध कीर्तनिया भी थे।स्थानीय प्रदर्शनों में कथा प्रसंगों को गा-गाकर लोगों के दिल पर राज करना, उनको लोकप्रिय और सर्वमान्य बनाता है।
उनकी रचनाओं की सहजता,देसज और खांटी शब्दों का प्रयोग उन्हें प्रसिद्धि दिलाने में कारगर साबित हुआ था।महिलाओं की आंतरिक भावनाओं को उभारने में वे सफल रहे थे,ऐसे में उनकी तूती बोलती थी।

उनकी रचनाओं को प्रसिद्ध करने की भूमिका में तवायफों का योगदान अमूल्य है।ये दिल को झकझोर देने वाली रचना रचते थे और उन्हें महफिलों में प्रस्तुत करने का स्वाभाविक कार्य तवायफें करती थीं।

एक अनूठा पक्ष,जो उन्हें महान से महानतम बनाता है और वह है उनका देश प्रेम।वे तत्कालीन सत्ता,जो ब्रिटिश हुकूमत की थी,उसके विरोध में उसे आर्थिक क्षति पहुंचा कर एक ऐसा प्रयास कर गये,जो उन्हें अमर स्वतंत्रता सेनानी भी सिद्ध करता है।बाबा ने जाली नोट छाप कर सत्ता को झकझोरने का काम किया।हालांकि इस मामले में एक लंबी जांच के बाद सीआईडी के द्वारा उन्हे जेल भी भेजा गया।उनकी गिरफ्तारी के बाद तवायफों द्वारा उन्हें जज से रिहा कर देने की गुहार उनकी प्रसिद्धि का अनूठा मिसाल है।

एक पूर्ण व्यक्ति के लिए इतने सारे गुण कम नहीं होते।दुर्भाग्यवश वे आज भी हाशिए पर हैं और उनको वह आदर नहीं मिल पाया,जो उन्हें मिलना चाहिए था।उन पर आरोप लगाये गये कि वे राष्ट्रद्रोही थे,वेश्या गामी थे,जो एक सोची समझी विरोधियों का राजनैतिक षड़यंत्र था।उन की गिरफ्तारी से संबंधित कागजात आज भी सीआईडी के अभिलेखागार में उपलब्ध है।अगर इस केस का अध्ययन किया जाय तो शोधकर्ताओं को दूध का दूध और पानी का पानी होता दीख जायेगा।
सरकार को चाहिए कि महेंद्र मिश्र जी को स्वतंत्रता सेनानी के रुप में मान्यता देकर उनके ऐसे महान योगदान को आदर दिया जाय।

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