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कैसे बदलेगा संसद और विधानसभाओं का गणित?

कैसे बदलेगा संसद और विधानसभाओं का गणित?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

केंद्र सरकार ने उन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की, जिसमें 2029 तक विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण को लागू करने के लिए की जाने परिसीमन प्रक्रिया पर दक्षिण भारतीय राज्यों के मन में उठ रही हैं।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों को यह कहकर गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है, कि जनसंख्या नियंत्रण के मानदंडों का पालन करने के कारण उन्हें परिसीमन प्रक्रिया में नुकसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि आप विधेयक के सभी प्रविधानों को देखेंगे, तो हर राज्य, क्षेत्र और समुदाय का ध्यान रखा गया है। चिंता की कोई बात नहीं है। अतीत में कुछ लोगों ने यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की कि सफल परिवार नियोजन के कारण दक्षिण के राज्यों को नुकसान होगा। वास्तव में, ये दक्षिण के राज्य भाग्यशाली हैं कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने और आनुपातिक रूप से कम आबादी के बावजूद उन्हें लाभ मिल रहा है।

संसद, विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की नई सदस्य संख्या क्या होगी?

जवाब: 131वां संशोधन बिल संवैधानिक सीमा को 550 चुनी हुई सीटों (राज्यों से 530 और UTs से 20) से बढ़ाकर 850 (राज्यों से 815 और UTs से 35) कर देता है। अंतिम संख्या इस सीमा के भीतर परिसीमन आयोग द्वारा तय की जाएगी। वर्तमान में चुनी हुई सदस्य संख्या 543 है।

राज्य विधानसभाएं: 500 (अधिकतम) और 60 (न्यूनतम) की संवैधानिक सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, परिसीमन बिल के अनुसार, प्रत्येक राज्य की विधानसभा की सदस्य संख्या उसकी लोकसभा सीटों का एक पूर्ण गुणक होनी चाहिए। जैसे-जैसे संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, विधानसभाओं का आकार अपने आप समायोजित हो जाएगा।

विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश: दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर इसमें शामिल हैं। इनकी सीटों की संख्या परिसीमन आयोग द्वारा तय की जाएगी। पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर को भी महिला आरक्षण के दायरे में लाया गया है।

 क्या लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी से राज्यों के मौजूदा अनुपात बने रहेंगे?

जवाब: संभावना कम है। मौजूदा आवंटन को 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर कर दिया गया था। नया परिसीमन नवीनतम प्रकाशित जनगणना डेटा का उपयोग करेगा, जो प्रभावी रूप से 2011 की जनगणना है।

जिन राज्यों में 1971 के बाद से जनसंख्या में अधिक वृद्धि हुई है। जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान, उन्हें सीटें मिलने की संभावना है। दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों का सापेक्ष हिस्सा कम हो सकता है। ये बिल मौजूदा अनुपातों को बनाए रखने की गारंटी नहीं देते हैं।

 क्या महिलाओं के लिए निर्वाचन क्षेत्र तय होंगे?

जवाब: नहीं। संशोधन में रोटेशन (बारी-बारी से बदलाव) का प्रावधान है, जिसके तहत प्रत्येक परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में बदलती रहेंगी। कोई भी सीट स्थायी रूप से आरक्षित नहीं की जाएगी।

क्या SC/ST सीटों पर कोई असर पड़ेगा?

जवाब: हां। परिसीमन आयोग, वर्तमान जनसंख्या वितरण के आधार पर SC/ST आरक्षण का निर्धारण करेगा। जिन जिलों में SC/ST की आबादी अधिक है, उन्हें सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य जिलों की सीटें कम हो सकती हैं।

अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड के लिए, ST सीटों का बंटवारा आनुपातिक आधार पर किया जाएगा, जो पिछली विधानसभाओं की संरचना से जुड़े पुराने फॉर्मूलों की जगह लेगा। त्रिपुरा में भी यही तरीका अपनाया जाएगा।

 परिसीमन आयोग के सदस्य कौन होते हैं?

जवाब: आयोग में तीन सदस्य होंगे: एक मौजूदा या रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज (अध्यक्ष के तौर पर), मुख्य चुनाव आयुक्त (या कोई नामित चुनाव आयुक्त), और संबंधित राज्य का राज्य चुनाव आयुक्त। हर राज्य में 10 सहयोगी सदस्य भी होंगे। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नामित पांच सांसद और राज्य विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नामित पांच विधायक। इन सदस्यों के पास वोट देने का अधिकार नहीं होता।

 आयोग कैसे काम करेगा?

जवाब: आयोग के पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां होती हैं। यह गवाहों को समन भेज सकता है, दस्तावेज मंगवा सकता है और सार्वजनिक रिकॉर्ड की मांग कर सकता है। यह मसौदा प्रस्ताव प्रकाशित करेगा, आपत्तियां आमंत्रित करेगा, जन सुनवाई करेगा और फिर अंतिम आदेश जारी करेगा।

एक बार भारत के राजपत्र में अधिसूचित होने के बाद, इन आदेशों को कानून का दर्जा मिल जाता है और इन्हें किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, न ही संसद या राज्य विधानसभाएं इनमें कोई बदलाव कर सकती हैं।

ये आदेश मौजूदा सदन या विधानसभा के भंग होने के बाद ही लागू होंगे। चुनाव आयोग बाद में सीमाओं में कोई बदलाव किए बिना, केवल तकनीकी त्रुटियों को ठीक कर सकता है।

 क्या तीनों बिलों को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी?

जवाब: नहीं। केवल 131वें संवैधानिक संशोधन के लिए ही संसद में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम आधे राज्यों की मंजूरी की जरूरत होगी। परिसीमन बिल को साधारण बहुमत से ही पास किया जा सकता है।

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