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लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, नहीं मिला दो तिहाई बहुमत

लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, नहीं मिला दो तिहाई बहुमत

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, ‘संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल पास नहीं हुआ, सदन में वोटिंग के दौरान इसे 2/3 बहुमत नहीं मिला। ‘बिल के लिए पहले राउंड का मतदान पूरा हुआ। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग में कुल 489 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। बिल के पक्ष में 278 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 211 वोट हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर बहस का जवाब देते हुए कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने अब तक एक भी OBC का प्रधानमंत्री नहीं दिया, भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया, अति पिछड़ा समाज के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाया।’

ओम बिरला ने कहा कि इस बिल पर विचार करने पर वोट विभाजन में हां के पक्ष में 298 और ना के पक्ष में 230 वोट पड़े। यह बिल दो तिहाई बहुमत से पास नहीं हो पाया। इसलिए इस बिल पर आगे की कार्यवाही पर निर्णय संभव नहीं है। यह बिल विचार करने के लिए पेश किए जाने के स्तर पर ही गिर गया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अन्य दो बिल आगे नहीं बढ़ाने का ऐलान किया।

बजट सत्र का विस्तार करते हुए सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है, जो गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को शुरू हो गया। इसमें तीन मुख्य विधेयक संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए। आज लोकसभा में वोटिंग होनी है।

सरकार ने कहा है कि इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के कार्यान्वयन में तेजी लाना है। मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को केंद्र सरकार ने सांसदों के बीच ड्राफ्ट बिल बांटे। ये बिल महिलाओं के लिए आरक्षण कानून ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने और नए सिरे से परिसीमन करने से जुड़े हैं।

महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिल मतदान के दौरान गिर गए. इस बिल के लोकसभा में गिर जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. संसद के मकर द्वार से यह प्रोटेस्ट शुरू हुआ. अब बीजेपी और एनडीए में शामिल दलों के कार्यकर्ता कल यानी 18 अप्रैल से इंडिया ब्लॉक से जुड़ी पार्टियों के नेताओं के घर के बाहर प्रोटेस्ट करेंगे.

महिला आरक्षण से जुड़े बिल पर 528 वोट पड़े. यह संविधान संशोधन बिल थे, जिन्हें पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी होता है. ऐसे में बिल पारित कराने के लिए 352 वोट की जरूरत थी, लेकिन बिल के पक्ष में 298 वोट ही पड़े. इस बिल के विरोध में 230 वोट पड़े.

अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अच्छा-बुरा सोचे बगैर इन्होंने नरेंद्र मोदी जी जो कर रहे हैं, उसका विरोध करने की ठान लिए हैं. मैंने तो सोचा था कि आज महिलाओं को आरक्षण के लिए बिल आ रहा है, इसका विरोध नहीं करेंगे. लेकिन इन्होंने इसका भी विरोध किया. ये जो बिल अर्जुन राम मेघवाल जी लेकर आए हैं,

इसमें लोकसभा सदस्यों की संख्या 850 तक करने की बात है. अनुच्छेद 81(3) में नवीन जनसंख्या के अनुसार परिभाषित करने के प्रावधान को समाप्त करते हैं. उन्होंने संशोधन भी गिनाए, और कहा कि सारे बदलावों का मूल उद्देश्य है कि माताओं-बहनों को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. 2023 में सर्वसम्मति से यह बिल पारित हुआ, लेकिन आज कांग्रेस पार्टी पीछे हो रही है.

यह बिल मोदीजी ला रहे हैं, बिल पारित होता है तो माताओं के बीच मोदीजी का यश बढ़ेगा. मोदी जी ने बड़ा एडवर्टाइज देकर यश देने का भी कह दिया. इस सदन ने 2023 में जो 33 फीसदी आरक्षण का सदन ने फैसला किया था, उससे ये पीछे हट रहे हैं. हमारे नेता ने तो कहा कि भाई अंतरात्मा की आवाज से वोट करिए. ये नारा मोदी जी का नारा, इंदिरा जी का है. यहां आत्मा ही नदारद है, अंतरात्मा कहां से लाएं.

धारा 370 समाप्त की, राम मंदिर का, CAA और तीन तलाक हम लेकर आए, कांग्रेस ने विरोध किया: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर बहस का जवाब देते हुए कहा, “ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक का विरोध हो रहा है, हमने धारा 370 समाप्त की, उन्होंने विरोध किया, राम मंदिर बनाया, विरोध किया, CAA लाए, विरोध किया, तीन तलाक समाप्त किया, विरोध किया, GST लाए, विरोध किया, आयुष्मान भारत बनाया, विरोध किया, नया संसद भवन बनाया, विरोध किया, CDS बनाया, विरोध किया, नक्सलवाद खत्म किया, विरोध किया, एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। इन्होंने अच्छा-बुरा सोचे बिना नरेंद्र मोदी जो कर रहे हैं, उसका विरोध करने का ठान लिया है।”

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