नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- आज मैं यहां एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने आया हूं, विशेष रूप से इस देश की महिलाओं के लिए. इस देश का हर नागरिक देख रहा है कि महिलाओं की प्रगति कैसे रुक गई है… हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद, हम सफल नहीं हो पाए हैं. ‘नारी शक्ति अधिनियम’ में संशोधन नहीं किए जा सके. और इसके लिए मैं देश की सभी माताओं और बहनों से क्षमा मांगता हूं. विपक्षी दलों ने शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खिलाफ मतदान किया था. जिसके बाद बिल गिर गया.
विपक्ष ने बिल की भ्रूण हत्या कर दी : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर हमला तेज करते हुए कहा- विपक्ष ने बिल की भ्रूण हत्या कर दी. कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके इसके अपराधी हैं. पीएम मोदी ने कहा- नारी शक्ति बिल समय की मांग है. भारत का प्रत्येक नागरिक देख रहा है कि किस प्रकार हमारी महिलाओं के सपनों को चकनाचूर किया जा रहा है.
नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा- नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती है. इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी.
महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके विपक्ष ने पाप किया : पीएम मोदी
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं उन पार्टियों से साफ-साफ कहना चाहूंगा जिन्होंने संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया था: ये लोग नारी शक्ति को हल्के में ले रहे हैं. वे भूल रहे हैं कि इक्कीसवीं सदी की महिलाएं देश में हो रही हर घटना पर बारीकी से नजर रख रही हैं. वे उनके इरादों को समझती हैं और सच्चाई से पूरी तरह वाकिफ हैं. इसलिए, महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके विपक्ष ने जो पाप किया है, उसकी सजा उन्हें जरूर मिलेगी.
कांग्रेस ने संशोधन का विरोध करने के लिए विपक्षी पार्टियों को उकसाया
PM नरेंद्र मोदी कहते हैं, व्यक्तिगत तौर पर मुझे उम्मीद थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती को सुधारेगी, वह अपने पापों का प्रायश्चित करेगी. लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने और महिलाओं के समर्थन में खड़े होने का मौका गंवा दिया. देश के ज्यादातर हिस्सों में कांग्रेस अपना अस्तित्व खो चुकी है. एक परजीवी की तरह, कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टियों के सहारे चलती है और खुद को जिंदा रखती है. लेकिन कांग्रेस यह भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हों. इसलिए, उसने कई क्षेत्रीय पार्टियों के भविष्य को अंधेरे में धकेलने की एक राजनीतिक साजिश रची, उन्हें इस संशोधन का विरोध करने के लिए उकसाया.
बिल गिरा तो विपक्ष के सांसद ताली बजा रहे थे : पीएम मोदी
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मुझे यह देखकर गहरा दुख हुआ कि जब महिलाओं के कल्याण से जुड़ा यह प्रस्ताव गिर गया, तो कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी पार्टी जैसी वंशवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं. महिलाओं के अधिकार छीनने के बाद ये लोग मेज थपथपा रहे थे. यह महिलाओं के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान पर एक हमला था. जब भी देश भर की महिलाएं अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में इन नेताओं को देखेंगी, तो उन्हें याद आएगा कि यही वे लोग थे जिन्होंने संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण को रोके जाने पर जश्न मनाया था और खुशियां मनाई थीं.
राष्ट्र का कल्याण हमारी प्राथमिकता : पीएम मोदी
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, राष्ट्र का कल्याण हमारी प्राथमिकता है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए राजनीतिक लाभ प्राथमिकता बन जाता है और वह भी राष्ट्र के कल्याण से बढ़कर तो इसका बोझ देश की महिलाओं को उठाना पड़ता है. इस बार भी ठीक ऐसा ही हुआ. देश की नारी शक्ति को कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का बोझ उठाना पड़ा.
पीएम मोदी ने दिया संकेत किस बारे में करेंगे बात
पीएम मोदी ने अपने संबोधन से पहले ही संकेत दे दिया कि वो किस बारे में बात करने वाले हैं. उन्होंने कोयंबटूर में रैली को संबोधित करते हुए कहा- DMK तमिलनाडु में हिंसा और अपराध को बढ़ावा देकर महिलाओं को नुकसान पहुंचाती है. वे संसद में भी महिलाओं के साथ खड़ी नहीं होतीं, लेकिन अब उनकी महिला-विरोधी विचारधारा को निश्चित रूप से करारा जवाब मिलेगा.
मैं आज रात 8.30 बजे इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करूंगा. आज, DMK के पास दिखाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है. यही कारण है कि उन्होंने तमिलनाडु की सीटों में कमी के बारे में झूठा डर फैलाने का सहारा लिया. DMK ने पहले कहा था कि मौजूदा आनुपातिक प्रतिनिधित्व को बनाए रखा जाना चाहिए, और हमने भी इसका प्रस्ताव रखा था. लेकिन अब उन्होंने यू-टर्न ले लिया.
मोदी सरकार लोकसभा में दो तिहाई बहुमत जुटाने में नाकाम रही
विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सत्तारूढ़ बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका. शुक्रवार रात लोकसभा में विधेयक पर हुए मतदान के दौरान 298 सदस्यों ने इसके समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया. मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 के मतों की आवश्यकता थी.
महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से जुड़ा है विधेयक
इस विधेयक के तहत 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 तक किया जाना था. राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी.
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