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अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर बड़ा एक्शन

अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर बड़ा एक्शन

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में 9 मार्च से हड़ताल पर चल रहे अंचल और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. जनगणना कार्य में सहयोग नहीं करने के आरोप में अब इन अधिकारियों के वेतन से 1000 रुपये की कटौती करने का निर्णय लिया गया है. इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

सरकार ने 624 हड़ताली अधिकारियों की सूची जिलाधिकारियों को भेज दी है. इन सभी के वेतन से जुर्माने की राशि काटी जाएगी. अधिकारियों पर यह कार्रवाई इसलिए की जा रही है क्योंकि उनकी हड़ताल से जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य पर असर पड़ रहा है.

जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत ऐसे सरकारी कर्मचारियों पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जो जिम्मेदारी मिलने के बावजूद जनगणना कार्य में सहयोग नहीं करते.

17 अप्रैल से शुरू है स्वगणना, विभाग बना नोडल एजेंसी

बता दें कि राज्य में 17 अप्रैल से स्वगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है. ऐसे में अधिकारियों की हड़ताल से काम प्रभावित होने पर सरकार ने यह कदम उठाया है.

यूनियन ने बातचीत की मांग उठाई

वहीं, बिरसा यूनाइटेड के अध्यक्ष आदित्य शिवमशंकर ने सरकार से हड़ताल के मुद्दे पर बातचीत करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि राजस्व सेवा के अधिकारी हमेशा निष्ठा और ईमानदारी से काम करते आए हैं और उनकी मांगें भी न्यायसंगत हैं. सरकार को इस पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए.

इस पूरे मामले में एक तरफ सरकार अनुशासन और कार्यकुशलता पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं. अब देखना होगा कि बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकलता है या और सख्ती बढ़ाई जाएगी.

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्य के सरकारी दफ्तरों की सुस्त वर्किंग कल्चर पर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अब दफ्तरों में मनमानी और देर से आने की आदत बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों और जिला पदाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचे और पूरे कार्यकाल के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें. अब औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे और अनुपस्थित पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी.

लेट आने पर वेतन कटौती का फरमान

सम्राट सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी देर से आता है और उसके अवकाश खाते में छुट्टी शेष नहीं है, तो उस अवधि का वेतन काट लिया जाएगा. यानी अब लेटलतीफी सीधे जेब पर असर डालेगी.

उपस्थिति के आधार पर ही बनेगा वेतन बिल

सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सैलरी बिल सिर्फ उपस्थिति विवरणी के आधार पर ही तैयार किया जाए. अगर इसमें लापरवाही हुई तो संबंधित अधिकारी भी जवाबदेह होंगे.

सरकार ने कार्यालय समय को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं. पांच दिवसीय कार्य सप्ताह वाले दफ्तरों में समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक रहेगा, जबकि दोपहर 1:00 से 2:00 बजे तक भोजन अवकाश होगा. महिला कर्मियों के लिए कार्यालय समय सुबह 9:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक निर्धारित है.

क्षेत्रीय कार्यालयों में अलग व्यवस्था लागू

प्रमंडलीय आयुक्त, महाधिवक्ता और मुख्य अभियंता जैसे क्षेत्रीय कार्यालयों में छह दिवसीय कार्य प्रणाली लागू रहेगी. यहां कार्यालय समय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होगा, जबकि सर्दियों में यह समय सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहेगा.

बायोमेट्रिक उपस्थिति पर बढ़ी सख्ती

सरकार ने 2022 से ही बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य किया हुआ है, लेकिन अब इसे और कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि कार्य समय में लापरवाही सरकारी कामकाज की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, इसलिए इस व्यवस्था को हर हाल में सख्ती से लागू किया जाएगा.

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