बंगाल में कमल राजनीति का नया अध्याय है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे जारी किए जा रहे हैं। रुझानों में तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी 188 सीटों पर बढ़त के साथ पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस काफी पीछे छूटती नजर आ रही है।
असम में भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है, वहीं तमिलनाडु में तमिझगा वेत्री कझगम ने बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया है। केरल में मुकाबला पारंपरिक दलों के बीच ही सिमटा हुआ है, जबकि पुडुचेरी में NDA सहयोगी आगे हैं।
इन रुझानों के साथ देश की राजनीति का नक्शा बदलता दिख रहा है। बंगाल की जमीन पर कल तक ‘जोरा घास फूल’ (टीएमसी का चुनाव चिह्न ) लहराता था, लेकिन अब वहां ‘कमल’ खिलता नजर आ रहा है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो भाजपा और उसके नेतृत्व वाले NDA की ताकत और बढ़ेगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन नतीजों के बाद देश के कितने राज्यों में भाजपा की सरकार होगी? कहां भाजपा सीधे सत्ता में है और कहां NDA के जरिए उसका प्रभाव है? आइए समझते हैं पूरी तस्वीर…
अब कितने राज्यों में भाजपा की सरकार है, इन सवालों के जवाब जानने से पहले जरूरी है भाजपा के उस सफर को समझना, जो एक छोटी राजनीतिक धारा से शुरू हुआ और देखते ही देखते देश की सबसे बड़ी ताकत बन गया।
भाजपा के उदय की कहानी
भारतीय जना पार्टी की कहानी सीधे साल 1980 से शुरू होती है, लेकिन इसकी जड़ भारतीय जनसंघ को माना जाता है। साल 1977 की बात है। आपातकाल के बादल छटे तो भारतीय जनसंघ ने अन्य दलों के साथ मिलकर जनता पार्टी का गठन किया, लेकिन यहां भी वर्चस्व की लड़ाई जारी थी।
साल 1980 में जनसंघ से आए नेताओं के खिलाफ दोहरी सदस्यता का मुद्दा उठा। उनके सामने शर्त रखी गई कि ‘जनता पार्टी छोड़ो या फिर संघ से रिश्ते तोड़ो’। इसका विरोध करते हुए जनसंघ से आए सदस्यों ने जनता पार्टी छोड़ दी। यहां से शुरू होती है, भाजपा के उदय की कहानी।
लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 6 अप्रैल, 1980 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गठन किया। अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के पहले अध्यक्ष बने। उन्होंने पार्टी को पहचान दिलाने और देश में कांग्रेस के एकाधिकार को खत्म करने के लिए खूब पसीना बहाया।
BJP ने पहला चुनाव कौन-सा लड़ा, कितनी सीटें मिली थीं?
देश में साल 1984 में लोकसभा चुनाव हुए। भाजपा का यह पहला चुनाव था। चुनाव से पहले प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बॉडीगार्डस ने उनकी हत्या कर दी थी। सहानुभूति की लहर में कांग्रेस की बंपर जीत हुई। भाजपा के खाते में सिर्फ दो सीटें आईं। यहीं से भाजपा के संघर्ष और विस्तार की असली यात्रा शुरू हुई।
कांग्रेस की लहर में जीतने वाले BJP के दो नेता कौन थे?
- ए के पटेल : मेहसाणा लोकसभा सीट से जीते थे। यह गुजरात में भाजपा के पहले सांसद भी थे।
- चंदूपतला जंगा रेड्डी: हनमकोंडा सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। रेड्डी आंध्र प्रदेश से भाजपा के पहले सांसद थे।
देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार कब बनी थी?
देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार साल 1989 के लोकसभा चुनाव के बाद बनी। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 85 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई। फिर भाजपा के समर्थन से नेशनल फ्रंट ने केंद्र में सरकार बनाई। वीपी सिंह देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
इसी दौर में भाजपा ने बोफोर्स घोटाले को बड़ा मुद्दा बनाया। 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि आंदोलन के समर्थन में सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकाली।
हालांकि, बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन यात्रा कारसेवकों ने आगे बढ़ाई।
इस पूरे घटनाक्रम का असर 1991 के चुनाव में दिखा, जब भाजपा 120 सीटों तक पहुंच गई और राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत शक्ति बनकर उभरी।
देश को कब मिला पहला भाजपाई प्रधानमंत्री?
साल 1996 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उनकी सरकार सिर्फ 13 दिन में गिर गई और वाजपेयी को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
1998 में भाजपा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का नेतृत्व करते हुए लोकसभा चुनाव लड़ा। उस वक्त एनडीए सहयोगियों में समता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, एआईएडीएमके और बीजू जनता दल शामिल थे।
टीडीपी ने बाहर से समर्थन दिया तो अटल बिहारी वाजपेयी दोबारा प्रधानमंत्री बने। हालांकि, 1999 में सहयोगी AIADMK के समर्थन वापस लेने से सरकार गिर गई।
साल 199 में फिर लोकसभा चुनाव हुए। इस बार NDA ने एआईएडीएमके के बिना ही 303 सीटें जीतीं। भाजपा को सबसे ज्यादा 183 सीटें मिली थीं। वाजपेयी तीसरी बार पीएम बने और अपना कार्यकाल पूरा किया था।
भाजपा का स्वर्णकाल
अटल बिहारी वाजपेयी ने 2004 में छह महीने पहले ही चुनाव का एलान कर दिया। भाजपा का मुद्दा इंडिया शाइनिंग था, इसके बावजूद भाजपा हार गई। लोकसभा चुनाव बाद बाद 10 साल तक देश में यूपीए की सरकार रही।
फिर 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला और वह देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने, जिन्हें अपनी पार्टी के दम पर बहुमत मिला। तब से अब तक देश में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है।
केंद्र में कितनी बार भाजपा की सरकार रही?
- 1996 में पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, लेकिन यह सरकार सिर्फ 13 दिन बाद ही गिर गई थी।
- 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार पीएम बने। इस बार सरकार 13 महीने चली।
- 1999 में वाजपेयी बहुमत से प्रधानमंत्री बने और कार्यकाल पूरा किया।
- 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी जीती और वह पीएम बने। कार्यकाल पूरा किया।
- 2019 में मोदी के नेतृत्व में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती। वह दूसरी बार पीएम बने।
- 2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत नहीं मिला। एनडीए के समर्थन से तीसरी बार पीएम पद की शपथ ली।
बता दें कि केंद्र में भाजपा की सरकार का पार्टी के गठन से लेकर अब तक छठा कार्यकाल चल रहा है।
किस राज्य में बनी थी पहली बार भाजपा की सरकार?
भाजपा के गठन के बाद सबसे राजस्थान में भाजपा की सरकार बनी। मुख्यमंत्री पद की शपथ भैरों सिंह शेखावत ने ली थी। शेखावत पहले जनसंघ में हुआ करते थे। हालांकि, इससे पहले जनता पार्टी की भी सरकार यहां बन चुकी थी। इसके बाद 90 के दशक में ही हिमाचल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में भी भाजपा की सरकार बनी।
अभी कितने राज्यों में भाजपा की सरकार है?
देश के अभी 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी एनडीए की सरकार है।
सीधे BJP सरकार
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उत्तर प्रदेश
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मध्य प्रदेश
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गुजरात
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राजस्थान
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हरियाणा
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उत्तराखंड
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असम (भाजपा की वापसी)
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अरुणाचल प्रदेश
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त्रिपुरा
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गोवा
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छत्तीसगढ़
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ओडिशा
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मणिपुर
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अब पश्चिम बंगाल
NDA सहयोगी दलों के साथ
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बिहार
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महाराष्ट्र
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आंध्र प्रदेश
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सिक्किम
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मेघालय
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नगालैंड
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पुडुचेरी (गठबंधन की वापसी)
बंगाल में कमल: राजनीति का नया अध्याय
पश्चिम बंगाल लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रहा, लेकिन अब जब यहां भी भाजपा सत्ता तक पहुंच गई है, तो यह सिर्फ एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि भाजपा के विस्तार की कहानी का नया अध्याय है।
बंगाल की जीत ने यह दिखा दिया कि भाजपा अब सिर्फ हिंदी पट्टी या पश्चिम भारत की पार्टी नहीं रही, बल्कि पूर्वी भारत में भी अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है।
