कर्नाटक में ‘जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट’ बनी कांग्रेस के लिए नया सिरदर्द
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले सिद्दरमैया ने अपने उत्तराधिकारी डीके शिवकुमार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए एक ‘टाइम बम’ छोड़ दिया है। इस्तीफा देने से एक दिन पहले सिद्दरमैया ने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की लंबे समय से लंबित जाति जनगणना (कास्ट सर्वे) रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।
यह रिपोर्ट 2017 से तैयार थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से लागू नहीं की जा सकी। 2023 में सत्ता में वापसी के बाद सिद्दरमैया ने नई सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कराई, जो 2025 में पूरी हुई।
रिपोर्ट क्यों संवेदनशील?
- रिपोर्ट के अनुसार पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और दलित समुदायों की संख्या लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों से ज्यादा हो सकती है।
- ये दोनों समुदाय कर्नाटक की राजनीति में दशकों से प्रभावशाली रहे हैं।
- सिद्दरमैया की AHINDA रणनीति इन्हीं पिछड़े और अल्पसंख्यक समूहों को एकजुट कर इन प्रभावशाली समुदायों को चुनौती देने की थी।
शिवकुमार पर दोहरा दबाव
डीके शिवकुमार, जो खुद प्रमुख वोक्कालिगा नेता हैं, अब कठिन स्थिति में हैं। अगर वे रिपोर्ट को लागू करने या सदन में पेश करने की दिशा में बढ़े तो लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों से भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, रिपोर्ट को टालने या दबाने पर AHINDA वोट बैंक नाराज हो सकता है, जिसे सिद्दरमैया ने वर्षों में मजबूत किया है।
राहुल गांधी की राष्ट्रीय छवि पर असर?
राहुल गांधी ने जाति जनगणना को कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति का मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने सामाजिक न्याय, ओबीसी आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए सटीक जाति डेटा पर जोर दिया है। कर्नाटक और तेलंगाना को इस रणनीति का बड़ा परीक्षण माना जा रहा था।
मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलफेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनने जा रही नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आज दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा करेंगे। जिसमें चार डिप्टी सीएम को लेकर भी मंथन होगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दरमैया, डीके शिवकुमार और AICC के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक के दौरान राज्यसभा उम्मीदवारों, MLC उम्मीदवारों और मंत्रिमंडल में फेरबदल पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा।
चार डिप्टी सीएम बनाने की संभावना
सूत्रों ने आगे बताया कि सिद्दरमैया के मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना कम है। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।
सिद्दरमैया के बेटे को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, सिद्दरमैया के बेटे और विधान परिषद के सदस्य यतींद्र को डीके शिवकुमार की कैबिनेट में शामिल किए जाने की पूरी उम्मीद है। उन्हें कोई अहम मंत्रालय मिलने की संभावना है, ताकि सिद्दरमैया की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जा सके।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक की तारीख आज तय की जाएगी जो कि अब महज एक औपचारिकता ही लगती है। इसके बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी।
कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर होने हैं चुनाव
कर्नाटक में राज्यसभा की जिन चार सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से कांग्रेस दो सीटें आसानी से जीतती दिख रही है। तीसरी सीट पर भी उसे बढ़त हासिल है, जिसके लिए उसे बस कुछ और वोटों की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि AICC के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला तीन में से दो राज्यसभा सीटों के लिए नामों का पैनल पेश करेंगे, और खड़गे को राज्यसभा में दोबारा मौका दिया जाएगा।
इसके अलावा, राज्य में विधान परिषद (MLC) की सात सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए भी संभावित नामों का एक पैनल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपा जाएगा।
राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बीते गुरुवार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने गुरुवार दोपहर तीन बजे लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन राज्यपाल की अनुपस्थिति के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था। आज राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सिद्दरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
राज्यपाला ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए लिखा, “मैं थावरचंद गहलोत भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।”
