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आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी परमा (पुरुषोत्तमी) एकादशी, व्रत से मिलता है अश्वमेध यज्ञ के समान फल

आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी परमा (पुरुषोत्तमी) एकादशी, व्रत से मिलता है अश्वमेध यज्ञ के समान फल

श्रीनारद मीडिया, दारौंदा, सीवान (बिहार)।

सीवन जिला सहित दारौंदा प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली विशेष परमा (पुरुषोत्तमी) एकादशी व्रत गुरुवार, 11 जून को श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी हर तीन वर्ष में एक बार अधिकमास में आती है और सभी एकादशी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी तथा श्रद्धालु व्रत रखकर सुख, समृद्धि और मोक्ष की कामना करेंगे।
पंडितों के अनुसार ‘परमा’ का अर्थ श्रेष्ठ या सर्वोत्तम होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों में इस व्रत को सौ यज्ञों के बराबर पुण्यदायी बताया गया है। साथ ही इसका पालन करने वाले भक्त को अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

अधिकमास में आने वाली यह एकादशी विशेष पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन दान-पुण्य, जप, तप, भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं और रात्रि में जागरण भी करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन तुलसी के पौधे के समीप घी का दीपक जलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। वहीं मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर प्रसाद वितरण करने से लक्ष्मी-नारायण की कृपा प्राप्त होती है।

ज्योतिष एवं धर्म विशेषज्ञों के अनुसार आर्थिक तंगी से मुक्ति के लिए एकादशी के दिन पीले वस्त्र में 11 कौड़ियां या सिक्के बांधकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के समक्ष रखने चाहिए। पूजा के बाद इसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर सुरक्षित रखने से आर्थिक स्थिति में सुधार और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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